बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् गमनागमने भवतो गमने बहुधा वसुधाधिपतेर्भवने । भवनं च विचित्रमलं रमया विदि नुश्च जनुः समये नितराम् ॥ ९३ ।। गमन अवस्था में हो तो राजगृह में जाने वाला, लक्ष्मी से पूर्ण गृहवाला होता है। यही फल आगमन अवस्था का भी होता है ।।९३।। सपदि विदिजनानामुच्चगे जन्मकाले सदसि धनसमृद्धिः सर्वदा पुण्यवृद्धिः। धनपतिसमता वा भूपता मन्त्रिता वा हरिहरपदभक्तिः सात्त्विकी मुक्तिलब्धिः ।। ९४ ।। सभा अवस्था में हो तो धनी, पुण्यकर्त्ता, उच्चराशि में हो तो बहुत धनी, राजा का मंत्री तथा ईश्वर का भक्त और अंत में मुक्ति पानेवाला होता है ।। ९४ ।। आगमे जनुष जन्मिनां यदा चन्द्रजे भवति हीनसेवया । अर्थसिद्धिरपि पुत्रयुग्मता बालिका भवति मानदायिका ।। ९५ ।। आगमन अवस्था में हो तो नीच सेवा से धन प्राप्त करने वाला, दो पुत्र और एक कन्या प्रतिष्ठा को देनेवाली होती है ।। ९५ ।। भोजने चन्द्रजे जन्मकाले यदा जन्मिनामर्थहानिः सदा वादतः । राजभीत्या कृशत्वं चलत्वं मतेरङ्गसङ्गो न जाया न मायासुखम् ।। भोजन अवस्था में हो तो वाद-विवाद (मुकदमे में) में द्रव्य की हानि, राजभय, कृशता, मन की अस्थिरता, शरीर, स्त्री तथा धन का सुख नहीं होता है ।। ९६ ।। नृत्यलिप्सागते चन्द्रजे मानवो मानयानप्रवालव्रजैः संयुतः । मित्रपुत्रप्रतापैः सभापण्डितः पापभे वारवामारतो लम्पटः ।। ९७ ।। नृत्यलिप्सा अवस्था में हो तो मान, वाहन, रत्न, मित्र, पुत्र और प्रताप से युक्त होता है। पापराशि में हो तो वेश्याप्रेमी और लम्पट होता है ।। ९७ ।। कौतुके चन्द्रजे जन्मकाले नृणामङ्गभे गीतविद्याऽनवद्या भवेत् । सप्तमे नैधने वारवध्वा रतिः पुण्यभे पुण्ययुक्ता मतिः सद्गतिः ।। कौतुकावस्था में होकर लग्न में हो तो गीतविद्या का पंडित, सातवें आठवें भाव में हो तो वेश्यागामी, ९वें भाव में हो तो पुण्यवान् बुद्धि होती है ।। ९८ ।।