बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहाणामवस्थाध्यायः २५५ पराक्रमी चण्डविपक्षहन्ता सुवारकान्तारतिरीतिविज्ञः ।।१३५।। निद्रा अवस्था में हो तो धनी, सुंदर गुणों से युक्त, पराक्रमी, दुष्टों का नाश करने वाला और वेश्यागामी होता है ।।१३५।। अथ राहोरवस्थाफलम्- यदागमो जन्मनि यस्य राहौ क्लेशाधिकत्वं शयनं प्रयाते । वृषेऽथ युग्मेऽपि च कन्यकामजे समाजो धनधान्यराशेः ।।१३६।। यदि राहु जन्मसमय में शयन अवस्था में हो तो जातक अधिक क्लेश से युक्त होता है। किन्तु वृष, मिथुन, कन्या या मेष में शयन अवस्था में हो तो धन-धान्य से पूर्ण होता है ।।१३६।। उपवेशनमिह गतवति राहौ दद्गुगदेन जनः परितप्तः। राजसमाजयुतो बहुमानी वित्तसुखेन सदा रहितः स्यात् ।।१३७।। उपवेशन अवस्था में हो तो दाद से पीडित, राजा से सम्मानित, अभिमानी, धनसुख से हीन होता है ।।१३७।। नेत्रपाणावगौ नेत्रे भवतो रोगपीडिते । दुष्टव्यालारिचोराणां भयं तस्य धनक्षयः ।।१३८।। नेत्रपाणि अवस्था में हो तो नेत्ररोग से पीडित, दुष्ट सर्प, शत्रु और चोर के भय से युक्त और धन की हानि होती है ।।१३८।। प्रकाशने शुभासने स्थितिः कृतिः शुभा नृणां धनोन्नतिर्गुणोन्नतिः सदा विदामगाविह । धराधिपाधिकारिता यशोलता तता भवे- न्नवीननीरदाकृतिर्विदेशतो महोन्नतिः ।।१३९।। प्रकाश अवस्था में हो तो सुंदर स्थान, सुंदर यश, धन और गुण की उन्नति, राजा से अधिकार की प्राप्ति, नूतन मेघ के समान आकृति और विदेश में उन्नति पाने वाला होता है ।।१३९।। गमने च यदा राहौ बहुसन्तानवान्नरः । पण्डितो धनवान्दाता राजपूज्यो नरो भवेत् ।।१४०।। गमन अवस्था में राहु हो तो बहुत संतानवाला, पंडित, धनी, दाता, राजा से पूज्य होता है ।।१४०।। राहावागमने क्रोधी सदा धीधनवर्जितः । कुटिलः कृपणः कामी नरो भवति सर्वथा ।।१४१।।