भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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२५६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् आगमन अवस्था में हो तो क्रोधी, बुद्धि तथा धन से हीन, कुटिल, कृपण, कामी होता है॥१४१॥ सभागतो यदा राहुः पण्डितः कृपणो नरः। नानागुणपरिक्रान्तो वित्तसौख्यसमन्वितः ॥१४२॥ सभा अवस्था में राहु हो तो पंडित और कृपण, अनेक गुणों से युक्त, धनसुख से युक्त होता है॥१४२॥ चेदगावागमं यस्य याते तदा व्याकुलत्वं सदारातिभीत्या भयम्। महद्बन्धुवादो जनानां निपातो भवेद्वित्तहानिः शठत्वं कृशत्वम्॥ आगमन अवस्था में हो तो हमेशा शत्रुभय से भयभीत और व्याकुल, बंधुओं से बड़ा विवाद और पतन, धन की हानि, मूर्खता और कृशता होती है॥१४३॥ भोजने भोजनेनालं विकलो मनुजो भवेत्। मन्दबुद्धिः क्रियाभीरुः स्त्रीपुत्रसुखवर्जितः॥१४४॥ भोजन अवस्था में हो तो भोजन के बिना विकल, मन्दबुद्धि, कार्य में आलसी, स्त्री-पुत्र के सुख से रहित होता है॥१४४॥ नृत्यलिप्सागते राहौ महाव्याधिविवर्धनम्। नेत्ररोगी रिपोर्भीतिर्धनधर्मक्षयो नृणाम् ॥१४५॥ नृत्यलिप्सा अवस्था में हो तो महाव्याधि का भय, नेत्र में रोग, शत्रुभय, धन-धर्म का नाश होता है॥१४५॥ कौतुके च यदा राहौ स्थानहीनो नरो भवेत्। परदाररतो नित्यं परवित्तापहारकः॥१४६॥ कौतुकावस्था में हो तो स्थानहीन, परस्त्रीगामी और परधन हरण करने वाला होता है॥१४६॥ निद्रावस्थां गते राहौ गुणग्रामयुतो नरः। कान्तासन्तानवान्धीरो गर्वितो बहुवित्तवान् ॥१४७॥ निद्रावस्था में हो तो गुण-समूह से युक्त, स्त्री-संतान से युक्त, धीर, गर्वीला और अधिक धनी होता है॥१४७॥ अथ केतोरवस्थाफलम्— मेषे वृषेऽथ युग्मे वा कन्यायां शयनं गते। केतौ धनसमृद्धिः स्यादन्यभे रोगवर्धनम् ॥१४८॥