बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 261, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दायाध्यायः २६३ लग्नायु को त्रैराशि द्वारा लाना चाहिए, जिसके लिए नीचे दी हुई तालिका से काम लेना चाहिए। १ राशि वा ३० अंश = १ वर्ष = १२ मास ∴ १ मास = ३०/१२ = २ १/२ अंश ∴ १ अंश = १२ दिन = ६० कला ∴ १ दिन = ५ कला = ६० घटी ∴ १ कला = १२ घटी = ६० विकला ∴ १ घटी = ५ विकला = ६० पल ∴ १ विकला = १२ पल अर्थात् १ राशि = १२ मास १ अंश = १२ दिन १ कला = १२ घटी १ विकला = १२ पल तात्पर्य यह हुआ कि अंश को २ से गुणाकर ५ से भाग देने से लब्धि मास शेष को ६ से गुणा कर देने से दिन होता है। कला को २ से गुणा कर १० से भाग देने से लब्धि दिन शेष को ६ से गुणा देने से घटी होता है। विकला को २ से गुणाकर १० से भाग देने से लब्धि घटी और शेष को ६ से गुणा करने से पल होता है। लग्न राश्यादि ९।१५।३२।५१ बलवान् है अतः राशितुल्य वर्ष ९ प्राप्त हुआ, शेष अंशादि १५।३२।५१ का त्रैराशिक द्वारा मासादि का साधन- अंश १५ × २ = ३० ÷ ५ = लब्धि ६ मास, शेष ० × ६ = ० दिन कला ३२ × २ = ६४ ÷ १० = लब्धि ६ दिन, शेष ४ × ६ = २४ घटी विकला ५१ × २ = १०२ ÷ १० = लब्धि १० घटी, शेष २ × ६ = १२ पल। राशितुल्य वर्षादि- ९।०।०।०।० अंशोत्पन्न मासादि- ०।६।०।०।० कलोत्पन्न दिनादि- ०।०।६।२४।० विकलोत्पन्न घट्यादि- ०।०।६।१०।१२ योगफल- ९।६।६।३४।१२ में पूर्वोक्त लग्नायुर्वर्षादि- ६।१।२९।९।३८ को जोड़ा तो स्पष्ट लग्नायुवर्षादि- १५।८।५।४२।० हुए।