बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दायाध्यायः २७७ देवलोकांश में शनि हो, भौम पारावतांश में हो और गुरु सिंहासनांश में होकर लग्न में हो तो मुनि समान आयुवाला होता है।।५६।। अथ युगान्तायुर्योगः- गोपुरांशे गुरौ केन्द्रे शुक्रे पारावतांशके। त्रिकोणे कर्कटे लग्ने युगान्तं स तु जीवति।।५७।। गोपुरांश में होकर गुरु केन्द्र में हो, शुक्र पारावतांश में होकर त्रिकोण में हो और कर्क-लग्न में जन्म हो तो युगान्त पर्यन्त आयु होती है।।५७।। अथ पूर्णायुर्योगः- चतुष्टये शुभैर्युक्ते लग्नेशे शुभसंयुते। गुरुणा दृष्टिसंयोगे पूर्णमायुस्तु जायते।।५८।। यदि केन्द्र में शुभ ग्रह हों, लग्नेश शुभग्रह से युक्त हो और गुरु से देखा जाता हो तो दीर्घायु होता है।।५८।। केन्द्रस्थिते च लग्नेशे गुरुशुक्रसमन्विते। ताभ्यां निरीक्षिते वापि पूर्णमायुर्विनिर्दिशेत्।।५९।। लग्नेश केन्द्र में हो और गुरु-शुक्र से युत वा दृष्ट हो तो पूर्णायु होती है।।५९।। स्वोच्चस्थितैस्त्रिभिः खेटैर्लग्नरन्ध्रेशसंयुतैः। रन्ध्रे पापविहीने च दीर्घमायुः समादिशेत्।।६०।। कोई तीन ग्रह अपनी उच्च राशि में लग्नेश, अष्टमेश से युत हों और अष्टम स्थान में कोई ग्रह न हो तो दीर्घायु होता है।।६०।। लयस्थितैस्त्रिभिः खेटैः स्वोच्चमित्रस्ववर्गगैः। लग्नेशे बलसंयुक्ते पूर्णमायुर्विनिर्दिशेत् ।।६१।। अपनी उच्च राशि वा मित्र की राशि में वा अपने वर्ग में होकर तीन ग्रह और लग्नेश बली हो तो पूर्ण आयु होती है।।६१।। स्वोच्चस्थितेन केनापि खेचरेण समन्वितः। रन्ध्रनाथो शनिर्वापि पूर्णमायुर्विनिर्दिशेत्।।६२।। अपने उच्च में गये हुए किसी ग्रह से अष्टमेश या शनि युत हो तो पूर्ण आयु होती है।।६२।।