भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 305, कुल 800 में से

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पृष्ठ 305

· अथ मारकप्रकरणम् ३०७ ब्रह्मग्रहाश्रितेशस्य दशादिः परिचिन्तयेत्। माहेश्वरर्क्षपर्यन्तं जातकस्यायुषि द्विज ।।१७।। ब्रह्मग्रहाश्रित राशि की दशा और माहेश्वर ग्रह की राशि की दशा को बनाना चाहिए। ब्रह्मग्रह की राशिदशा से माहेश्वर ग्रह की राशि दशा पर्यन्त ही जातक की आयु होती है ।।१७।। तत्तद्राशित्रिकोणेषु राशिरन्तर्गते मृतिः। चराच्च स्थिरपर्यन्तं दशायां चिन्तयेद्द्विज ।।१८।। दशाओं के त्रिकोण राशियों की अंतर्दशा में मृत्यु होती है। अतः चर से स्थिर राशि की दशा पर्यन्त यह विचार करना चाहिए ।।१८।। तथा महादशायां च आयुर्दायं विलोकयेत्। विंशोत्तार्यादिकं चैव यथान्यायेषु योजयेत् ।।१९।। तथा विंशोत्तरी महादशा और अंतर्दशा में भी आयु का विचार करना चाहिए ।।१९।। माहेश्वरस्य यो राशिरष्टमेशाश्रयी द्विज। तत्तद्राशित्रिकोणेषु राशावन्तर्गते मृतिः।।२०।। अथवा माहेश्वर से अष्टमेश के आश्रयीभूत जो राशि हो उस राशि से त्रिकोण राशि की अन्तर्दशा में मृत्यु होती है।।२०।। अत्राब्द इति निर्देशात्तत्तद्राशिदशाक्रमः। अब्दो द्वादशधाभागे अन्तरैकैकराशि च ।।२०।। यहाँ पर वर्ष दशाक्रम से लेना चाहिए और वर्ष में १२ का भाग देने से अन्तर्दशा का वर्ष होता है।।२१।। षष्ठाष्टमेशौ भवतो मारकावष्टमेश्वरः। प्रायेण मारको राशिदशास्त्वत्र विशेषतः।।२२।। षष्ठेश और अष्टमेश मारक होते हैं, किन्तु प्रायः अष्टमेश ही मुख्य मारक होता है।।२२।। षष्ठभे पापभूयिष्ठे षष्ठेशो मुख्यमारकः। षष्ठात् त्रिकोणगो वापि मुख्यमारक इष्यते ।।२३।। छठे स्थान में अधिक पापग्रह हों तो षष्ठेश ही मुख्य मारक होता है अथवा षष्ठेश से त्रिकोण राशि मारक होती है।।२३।।