बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ पित्रादिनिर्याणाध्यायः ३११ अथ भ्रातृनिर्याणम्— लग्नाद्वा सप्तमाद्वापि बली वीक्षेत्तृतीयकम्। तस्याः शूलदशायां च भ्रातृनिर्याणमेव च॥१९८॥ लग्न और सप्तम में जो बली हो, उससे तृतीय राशि की शूलदशा में भाई का निधन होता है।१९८॥ अथ ज्येष्ठभ्रातृनिर्याणम्— लग्नाद्वा सप्तमाद्वापि लाभराशिर्बली द्विज। तस्याः शूलदशायां च निर्याणमग्रजस्य च॥१९९॥ लग्न वा सप्तम में जो बली हो, उससे ११वीं राशि की शूल दशा में ज्येष्ठ भाई की मृत्यु होती है॥१९९॥ भगिनी-पुत्रयोर्निर्याणम्— लग्नाद्वा सप्तमाद्वापि राशिपञ्चमके बली। तस्याः शूलदशायां च निर्याणं भगिनीपुत्रयोः॥२००॥ लग्न और सप्तम में जो बली हो, उससे पाँचवीं राशि की शूलदशा में भगिनी और पुत्र का निर्याण होता है॥२००॥ अथ कलत्रनिर्याणमाह— कलत्रकारकः खेटस्तथा स्त्रीराशिचिन्तनम्। तत्त्रिकोणदशायां च कलत्रनिधनं भवेत्॥२१॥ स्त्रीकारक और सप्तम में जो बली हो, उससे त्रिकोण राशि की दशा में स्त्री का निधन होता है॥२१॥ अथान्येषां निर्याणमाह— तत्तत्कारकाश्च ये ये च त्रिकोणदशान्तरे। तेषां च मातुलादीनां निधनं भवति ध्रुवम्॥२२॥ इससे अतिरिक्त जिसके निधन का विचार करना हो उसके कारकों की आश्रयीभूत राशि की दशा अंतर में उन लोगों का (मामा आदि का) निधन कहना चाहिए।।२२।। अथ मृत्युसमये कष्टादिज्ञानमाह— लग्नाद्वा कारकाच्चापि तृतीये पापखेचरे। युते दृष्टेऽथ वा विप्र दुष्टं मरणमुच्यते॥२३॥