बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथाष्टकवर्गफलाध्यायः ३४१ भूमिं कलत्रं वित्तं च तद्देशे निर्दिशेन्नृणाम्। शुक्राज्जामित्रतो लब्धिं दारेशान्वितदिग्भवा ।।३६।। उसके अनुसार मनुष्यों को भूमि, स्त्री, धन और देश का आदेश करना चाहिए। शुक्र से ७वें स्थान के देश में वा सप्तमेश के देश में स्त्री का लाभ होता है।।३६।। दाराधिपस्थितं क्षेत्रं दाराजन्मर्क्षकं विदुः। तस्यांशके त्रिकोणे वा दाराजन्मर्क्षकं विदुः।।३७।। मन्दांशे मन्दसंयुक्ते मन्दक्षेत्रेऽथवा भृगौ। नीचांशे मन्दसंयुक्ते नीचस्त्रीभोगमिच्छति।।३८।। दारेश जिस राशि में हो वही राशि स्त्री की होती है। अथवा उसके नवांश की राशि वा उसके त्रिकोण की राशि स्त्री की राशि होती है।।३८।। भौमांशकगते शुक्रे भौमक्षेत्रगतेऽपि वा। भौमेन युतदृष्टे च परस्त्रीभोगमिच्छति।।३९।। शुक्र शनि के नवांश में हो और शनि से युत हो अथवा शनि की राशि में हो, अपने नीचांश में पापग्रह से युक्त हो तो नीच स्त्री की इच्छा होती है। शुक्र भौम के नवांश में हो अथवा भौम की राशि में हो और भौम से युत वा देखा जाता हो तो परस्त्रीगामी होता है।।३९।। जामित्रे मन्दभौमांशे तदीशे मन्दभौमभे। वेश्या वा जारिणी वापि तस्य भार्या न संशयः।।४०।। सप्तम स्थान में शनि वा भौम का अंश हो और उसके स्वामी शनि वा भौम की राशि में हो तो उसकी स्त्री वेश्या वा जारिणी होती है।।४०।। शुक्रजामित्रतो लब्धिस्त्रिकोणा देशदिक्स्त्रियः। भृगुदारेशयुक्तर्क्ष फलसंख्या स्त्रियो विदुः।।४१।। शुक्र से सातवें स्थान के अनुसार वा उससे त्रिकोण राशि के अनुसार देश, दिशा, स्त्री का कहना चाहिए। शुक्र से सप्तमेश से युत राशि के फल की संख्या तुल्य स्त्री की संख्या कहनी चाहिए।।४१।। शुक्रांशकसमाना स्त्री वर्णरूपगुणान्विता। भवेच्छाशाङ्कतुल्या वा दारेशस्य गुणान्विता।।४२।।