भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 346, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 346

३४८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् बनावे, उस राश्यादि के तुल्य सूर्य जिस मास में हों, उस मास में क्लेश अथवा मृत्यु कहना ।।६५।। उदाहरण— सूर्य ३।१८।२६ इसका कला बनाने से ६५०६ हुआ। राहु ७।१३।२७ इसका कला १३४०७ हुआ। सूर्य के कला से राहु के कला को गुणने से गुणनफल ८७२२५९४२ हुआ। इसमें २१६०० का भाग देने से लब्ध ४०३८ हुआ। इसे सूर्य की कला में जोड़ने से १०५४४ हुआ। इसमें ६० का भाग देने से लब्ध १७५ अंश और शेष ४४ कला हुआ। अंश में ३० का भाग देने से ५ राशि २५ अंश और ४४ कला हुआ। इसके तुल्य राश्यादि सूर्य जब जिस मास में होगा उस मास में मृत्यु होगी। मंगल राश्यादि १०।२२।३२ इसका कला १९३२० हुआ। इसे सूर्य के कला ६५०६ से गुण दिया तो गुणनफल १२५६९५९२० हुआ। इसमें २१६०० से भाग देने से लब्धि ५८१९ हुई। इसे सूर्य के कला में जोड़ देने से १२३२५ कला हुआ। इसका राश्यादि बनाने से ६।२५।२५ हुआ। इसके तुल्य सूर्य जब होवें उस समय कष्ट वा मृत्यु कहना। अथ निधनचन्द्रमाह— अष्टमेशत्रिकोणे विधुः स्याद्यदा योगमिन्दौ तथा तन्नवांशेऽपि वा। तत्रिकोणे प्रयाते मृतिं निर्दिशेन्निश्चयात्स्वल्परेखोद्भवेवासरे ।। अष्टमेश जिस राशि में है उससे त्रिकोण राशि में जब चन्द्रमा होता है अथवा अष्टमेश जिस नवांश में है उससे त्रिकोण राशि में जब चन्द्रमा हो और उस दिन अल्प रेखा हो तो उस दिन मृत्यु होती है।।६६।। अथ सशान्तिकरेखाफलम्— रेखाभिः सप्तभिर्युक्ते मासे मृत्युर्नृणां भवेत्। सुवर्णं विंशतिपलं दद्याद् द्वौ तिलपर्वतौ ।।६७।। जिस राशि में सात रेखायें हों उस राशि के सूर्य में जातक को कष्ट होता है। इसकी शान्ति के लिए २० तोला सोना और २ तिल के पर्वत दान करना चाहिए।।६७।। रेखाभिर्वसुभिर्जाते शीघ्रं मृत्युवशो नरः। असत्फलविनाशाय दद्यात्कर्पूरजां तुलाम् ।।६८।। जिस राशि में ८ रेखायें हों उस मास में मृत्यु तुल्य कष्ट होता है। इसकी शान्ति के लिए कपूर का तुलादान करना चाहिए।।६८।।