भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 347, कुल 800 में से

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पृष्ठ 347

अथाष्टकवर्गफलाध्यायः ३४९ रेखाभिर्नवभिः सर्पान्म्रियते मनुजो ध्रुवम्। अश्वैश्चतुर्भिः संयुक्तं रथं दद्याच्छुभाप्तये।।६९।। नव रेखाएँ जिस राशि में हों उस मास में सर्प का भय होता है। इसकी शान्ति के लिए ४ घोड़ों के सहित रथ का दान करना चाहिए।।६९।। रेखाभिर्दशभिः शस्त्रात्प्राणांस्त्यजति मानवः। दद्याच्छुभफलावाप्त्यै कवचं वज्रसंयुतम् ।।७० ।। जिस राशि में दस रेखाएँ हों तो उस मास में शस्त्र से भय होता है। इसकी शान्ति के लिए वज्र ही से युक्त कवच का दान करना चाहिए ।।७०।। रुद्रैः प्राप्याभिशापं च प्राणैर्युक्तो भवेन्नरः। दिक्पलैः स्वर्णघटितां प्रदद्यात्प्रतिमां विधोः।।७१।। जिस राशि में ११ रेखाएँ हों तो उस मास में अभिशाप से मृत्युभय होता है। उससे बचने के लिए १० तोले सुवर्ण की चन्द्रमा की प्रतिमा को दान करें।।७१।। आदित्यैर्जलदोषेण मानवस्य मृतिं वदेत्। भूमिं दद्याद्ब्राह्मणाय दाने शुभफलं भवेत् ।।७२।। जिस राशि में १२ रेखायें हों उस मास में जल से मृत्युभय होता है। उसकी शान्ति के लिए भूमि का दान करना चाहिए ।।७२ ।। त्रयोदशमितैर्व्याघ्रान्मानवो मृत्युमाप्नुयात् । विष्णोर्हिरण्यगर्भस्य दानं कुर्याच्छुभाप्तये।।७३।। जिस राशि में १३ रेखायें हों उस मास में व्याघ्र का भय होता है। इसकी शान्ति के लिए विष्णु की हिरण्यगर्भ प्रतिमा (शालिग्राम) का दान करना चाहिए ।।७३ ।। अचिराज्जीवितं जह्याच्छक्रैः कालेन भक्षितः। वराहप्रतिमां दद्यात्कनकेन विनिर्मिताम् ।।७४ ।। जिस राशि में १४ रेखाएँ हों तो उस मास में अधिक कष्ट होता है। उसकी शान्ति के लिए सुवर्ण की वाराह की प्रतिमा का दान करना चाहिए।।७४।। राज्ञो भयं तिथिमितैस्तत्र हस्ती प्रदीयते । रिष्टं भूपैः कल्पतरोः प्रतिमां च निवेदयेत् ।।७५ ।।

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