भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 367

अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३६९ लग्नेशे पुत्रराशिस्थे पुत्रेशे लग्नमाश्रिते। केन्द्रत्रिकोणगे जीवे बहुपुत्रं समादिशेत् ।।१०७।। लग्नेश पाँचवें भाव में, पंचमेश लग्न में, केन्द्र (१,४,७,१०), त्रिकोण (९,५) भाव में गुरु हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।१०७।। पुत्रस्थानगते राहौ मन्दांशकविवर्जिते। बहुपुत्रं नरं विद्याच्छुभग्रहनिरीक्षिते ।।१०८।। पाँचवें भाव में राहु शनि के नवांश में न हो, यदि शुभग्रह देखता हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।१०८।। पुत्रस्थानाधिपे स्वोच्चे लग्नेशे शुभसंयुते। कारके शुभसंयुक्ते बहुपुत्रं समादिशेत् ।।१०९।। पंचमेश अपने उच्च में हो, लग्नेश शुभग्रह से युत हो और कारक शुभग्रह हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।१०९।। पुत्रस्थानं तदीशे वा गुरौ वा शुभवीक्षिते। शुभेन सहिते वापि बहुपुत्रं समादिशेत् ।।११०।। पंचम स्थान में पंचमेश वा गुरु हो, शुभग्रह से दृष्ट हो या शुभग्रह से युक्त हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।११०।। परिपूर्णबले जीवे लग्नेशे पुत्रराशिगे। पुत्रेशे बलसंयुक्ते बहुपुत्रं समादिशेत् ।।१११।। गुरु पूर्ण बली हो तथा लग्नेश पाँचवें भाव में हो और पंचमेश बली हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।१११।। पुत्रस्थानगते जीवे परिपूर्णबलान्विते। लग्नेशे बलयुक्ते पुत्रयोगा इमे स्मृताः ।।११२।। पाँचवें पूर्ण बली गुरु हो, लग्नेश बली हो तो अनेक पुत्र होते हैं।।११२।। वर्गोत्तमांशगे जीवे लग्नेशस्यांशपे शुभे। पुत्रेशेन युते दृष्टे पुत्रयोगा इमे स्मृताः ।।११२।। गुरु वर्गोत्तम नवांश में हो, लग्नेश के नवांश में शुभग्रह हो, पंचमेश से युत वा दृष्ट हो तो बहुत पुत्र होते हैं।।११३।। वित्तेशे पुत्रभावस्थे परिपूर्णबलान्विते। वैशेषिकांशके जीवे पुत्रयोगा इमे स्मृताः ।।११४।।