भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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३७२. बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सुते राह्वर्कशुक्रेज्याः शुभर्क्षे शुभवीक्षिते। पुत्रेशे शुभराशिस्थे चिरात्पुत्रमुपैति सः॥१२८॥ पाँचवें भाव में शुभग्रह की राशि में राहु, सूर्य, शुक्र, गुरु हों, शुभग्रह से देखे जाते हों और पंचमेश शुभ राशि में हो तो बहुत दिनों में संतान होती है॥१२८॥ लग्ने सौम्ये धने पापे तृतीये पापखेचरे। पुत्रेशे शुभराशिस्थे चिरात्पुत्रमुपैति सः॥१२९॥ लग्न में शुभग्रह, दूसरे भाव में पापग्रह, तीसरे में पापग्रह और पंचमेश शुभराशि में हो तो बहुत समय में संतान होती है॥१२९॥ अथ दत्तकपुत्रयोगः- पुत्रस्थाने कुजे मन्दे बुधक्षेत्रे विलग्नगे। बुधदृष्टे युते वापि तदा दत्तसुतादयः॥१३०॥ पंचम भाव में भौम, शनि हों, जन्मलग्न में बुध की राशि हो और बुध से दृष्ट वा युत हो तो दत्तक पुत्र होता है॥१३०॥ पुत्रस्थाने बुधक्षेत्रे मन्दक्षेत्रेऽथवा भवेत्। मन्दमान्दियुते दृष्टे तदा दत्तादयः सुताः॥१३१॥ पंचम भाव में बुध वा शनि की राशि हो और शनि तथा गुलिक से युत वा दृष्ट हो तो दत्तक पुत्र होते हैं॥१३१॥ पुत्रेशे मन्दसंयुक्ते कुजे सौम्यनिरीक्षिते। लग्नाधिपे बुधांशे वा दत्तपुत्रा भवन्ति हि॥१३२॥ पंचमेश शनि से युत हो, भौम-बुध से देखा जाता हो, लग्नेश बुध के नवांश में हो तो दत्तक पुत्र होता है॥१३२॥ कामेशे लाभभावस्थे पुत्रेशे शुभसंयुते। पुत्रे मन्दे बुधे वापि दत्तपुत्रा भवन्ति हि॥१३३॥ सप्तमेश एकादश भाव में, पंचमेश शुभग्रह से युक्त हो, पाँचवें भाव में शनि वा बुध हो तो दत्तक संतति होती है॥१३३॥ पुत्रेशे भाग्यभावस्थे भाग्येशे कर्मराशिगे। पुत्रे मन्देन संदृष्टे दत्तपुत्रेण सन्ततिः॥१३४॥ पंचमेश भाग्यभाव में, भाग्येश कर्मभाव में, पाँचवें भाव को शनि देखता हो तो दत्तक पुत्र होता है॥१३४॥