भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३७३ लग्नाधिपे भृगुः स्वोच्चे पुत्रे मन्दसमन्विते । कारके बलसंयुक्ते दत्तपुत्रा तु सन्ततिः ॥ १३५ ॥ लग्नेश और शुक्र उच्च में हो, पाँचवें भाव में शनि हो और कारक बली हो तो दत्तक पुत्र होता है ॥ १३५ ॥ पुत्रस्थानाधिपे चन्द्रे लग्ने पुत्रे शनैश्चरे । परिपूर्णबले जीवे दत्तपुत्रात्सुतो भवेत् ॥ १३६ ॥ पंचमेश चन्द्र लग्न में, पाँचवें भाव में शनि हो, गुरु बलवान् हो तो दत्तक पुत्र होता है ॥ १३६ ॥ पुत्राधिपे रवौ लग्ने पुत्रस्थौ शनिसोमजौ । पुत्राधिपे बलयुते दत्तपुत्रात्सुतो भवेत् ॥ १३७ ॥ पंचमेश रवि लग्न में और पंचम में शनि-बुध हों, पंचमेश बली हो तो दत्तक पुत्र होता है ॥ १३७ ॥ लग्नाधिपे बुधे पुत्रे कुजदृष्टिसमन्विते । कारके लाभराशिस्थे दत्तपुत्रात्सुतो भवेत् ॥ १३८ ॥ लग्नेश बुध पाँचवें भाव में भौम से देखा जाता हो और कारक लाभभाव में हो तो दत्तक पुत्र होता है ॥ १३८ ॥ लग्नाधिपे गुरौ पुत्रे शनिदृष्टिसमन्विते । पुत्रेशे भौमराशिस्थे दत्तपुत्रा भवन्ति हि ॥ १३९ ॥ लग्नेश गुरु पाँचवें भाव में शनि से देखा जाता हो और पंचमेश भौम की राशि में हो तो दत्तक पुत्र होता है ॥ १३९ ॥ अस्य शान्तिमाह- वंशान्तो हरिकृष्णगो त्रिपुरहाऽब्जे भूसुते रुद्रियं सौम्ये सम्पुटकांस्यपात्रविविधवज्जीवेन पैत्र्यातिथिः । शुक्रे गोप्रतिपालनं च कथितं मन्दे च मृत्युञ्जयः कन्यादानभुजङ्गकेतुकपिलाः सन्तानसौख्यप्रदाः ॥ १४० ॥ यदि संतान के बाधक सूर्य हो तो हरिवंशपुराण सुनना चाहिए। चन्द्रमा के लिए शिवपूजन, भौम हो तो रुद्राभिषेक, बुध हो तो विधिवत् कांस्यपात्र और संपुट, गुरु हो तो पितृपूजन (गयाश्राद्ध), शुक्र हो तो गो-सेवा, शनि हो तो मृत्युञ्जय का जप, राहु हो तो कन्यादान और केतु हो तो कपिला गौ का दान करने से सन्तान का सुख होता है ॥ १४० ॥