बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७८ . . बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सूर्यहोरागते शुक्ले चन्द्रस्य कृष्णपक्षके। तदा नृणां फलार्थाय विचिन्त्या षोडशोत्तरी ॥२०॥ शुक्लपक्ष में जन्म हो और लग्न में सूर्य की होरा हो अथवा कृष्णपक्ष में जन्म हो और लग्न में चन्द्रमा की होरा हो तो दशाफल जानने के लिए षोडशोत्तरी दशा लेना चाहिए।॥२०॥ अथ षोडशोत्तरीदशाज्ञानाय चक्रम्—
| सू. | मं. | बृ. | श. | के. | चं. | बु. | शु. | ग्रहाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | वर्षाणि |
| पु. | श्ले. | म. | पू.फा. | उ.फा. | ह. | चि. | स्वा. | |
| स्वा. | वि. | अनु. | ज्ये. | मू. | पू.षा. | उ.षा. | श्र. | नक्षत्राणि |
| ध. | शत. | पू.भा. | उ.भा. | रे. | अ. | भ. | कृ. | |
| रो. | मृ. | आ. | पुन. | × | × | × | × |
नोट— इस दशा का भुक्त-भोग्य विंशोत्तरी दशा के समान ही भयात भोग द्वारा लाना चाहिए। इति षोडशोत्तरीदशाक्रमः। अथ द्वादशोत्तरीदशाक्रमम्— सूर्यो गुरुः शिखी ज्ञोऽगुः कुजो मन्दो निशाकरः। शुक्रहीना दशा ह्येतद्द्विचयात्सप्तमात्समाः ॥२१॥ सूर्य, गुरु, केतु, बुध, राहु, भौम, शनि और चन्द्रमा ये ही शुक्र को छोड़कर दशेश होते हैं और सात से दो-दो जोड़ने से इनके दशा वर्ष भी होते हैं॥२१॥ जन्मभात्यौष्णपर्यन्तं गणयेदष्टभिर्भजेत्। नवामांशे यदा जाता शुक्रस्य द्वादशोत्तरी ॥२२॥ जन्मनक्षत्र से रेवती पर्यन्त गिनकर जो संख्या हो उसमें ८ का भाग देने से शेष तुल्य दशेश होते हैं। यदि शुक्र के नवमांश में जन्म हो तो द्वादशोत्तरी दशा से फल कहना चाहिए॥२२॥ नोट— यहाँ भी विंशोत्तरी दशा के समान ही भुक्त-भोग्य लाना चाहिए।