भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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३८६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् दशा में जन्म हुआ। इसे ६ से गुणा करने से गुणनफल ४६।२४ हुआ। इसमें ४५ से भाग देने से १।०।२४।०।१० इसे ९ जगह लिखकर १,२,३,४,५,६,७,८,९ से गुणा करने से सूर्य आदि ग्रहों के क्रम से दशा वर्ष हुए। इति कालदशा। अथ चक्रदशामाह- राशीश्वराद्दशा ज्ञेया सूर्यादीनां क्रमात्पुनः। दिवारात्रिस्तथा सन्ध्यात्रिकाले त्रिविधा दशा ।।४९।। दिन, रात और संध्या के अनुसार राशी और राशीस्वर के अनुसार ३ प्रकार की दशा होती है।।४९।। दिवालग्रेशस्थिताद्भाच्च रात्रौ लग्नश्रितात्तथा।।५०।। सन्ध्यायां धनभावस्थाद् ज्ञेया चक्रदशा बुधैः ।।५०।। दिन में जन्म हो तो लग्नेश जिस राशि में हो उस राशि से, रात में जन्म हो तो लग्न में जो राशि हो उससे और संध्या में जन्म हो तो द्वितीय भाव की राशि से सूर्यादि ग्रहों की दशा होती है।।५०।। राशीनां दश वर्षाण्येकेकस्य दशा भवेत्। क्रमाद् द्वादशराशीनां विज्ञातव्या द्विजोत्तम।।५१।। क्रम से १२ राशियों की प्रत्येक का दश-दश वर्ष दशा का प्रमाण होता है, इसे चक्रदशा कहते हैं।।५१।। उदाहरण- दिन में जन्म है (पृ. २४ का चक्र देखो), लग्नेश शनि वृश्चिक राशि में है, अतः वृश्चिक राशि से दशा का आरम्भ हुआ। स्पष्टार्थ चक्र देखिए।

वृ.ध.म.कुं.मी.मे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.
१०१०१०१०१०१०१०१०१०१०१०१०
२०१३२३३३४३५३६३७३८३९३२१०३१३२३
१८१८१८१८१८१८१८१८१८१८१८१८

इति चक्रदशा।