भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 387, कुल 800 में से

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अथ दशाध्यायः ३८९ सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धन) और इनके स्वामी क्रम से दशाधीश होते हैं।।५९।। देहजीवौ नक्रयुग्मौ दिगीशार्काष्टभूधराः। षड्वेदशरलोकानां राशिपाश्च दशाधिपाः।।६०।। अश्विनी के दूसरे चरण में मकर देह और मिथुन जीव संज्ञक होता है और १०, ११, १२, ८, ७, ६, ४, ५, ३ राशियों अर्थात् मकर, कुम्भ, मीन, वृश्चिक, तुला, कन्या, कर्क, सिंह और मिथुन के स्वामी दशाधिपति होते हैं।।६०।। दास्त्रादि दशताराणां तृतीयचरणेषु च। गौर्देहो मिथुनं जीवो द्वेकार्केशदशाङ्ककाः।।६१।। क्वक्षिरामाख्यनाथास्ते दशाधिपतयः क्रमात्। अश्विन्यादिदशोडूनां चतुर्थचरणेषु च।।६२।। अश्विनी आदि १० नक्षत्रों के ३ रे चरण में वृष देह और मिथुन राशि जीव संज्ञक होती है और २, १, १२, ११, १०, ९, १, २, ३ राशियों के स्वामी क्रम से दशा के स्वामी होते हैं। अश्विनी आदि १० नक्षत्रों के चौथे चरण में।।६२।। कर्कमीनौ देहजीवौ कर्कादिनवमेश्वराः। दशाधिपाश्च विज्ञेया श्रृणु पार्वति निश्चितम् ।।६३ ।। कर्क देह और मीन राशि जीव संज्ञक होती है और कर्क से मीन पर्यन्त ९ राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।६३।। याम्येज्यचित्रातोयर्क्ष उत्तराभाद्रपदांस्तथा। एतत्पञ्चजोडुपादानां भरण्यादौ च वीक्षयेत् ।।६४।। भरणी, पुष्य, चित्रा, पूर्वाषाढ़, उत्तराभाद्रपद इन पाँच नक्षत्रों के चरणों का भरणी नक्षत्र के समान ही विचार करना चाहिए।।६४।। याम्यप्रथमपादस्य देहजीवावलिर्झषः। नागागर्तुपयोधीषु रामाक्षीन्द्वर्कभेश्वराः।।६५।। भरणी के प्रथम चरण में वृश्चिक देह और मीन राशि जीव संज्ञक हैं। ८।७।६।४।५।३।२।१।१२ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।६५।।