भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 388, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 388

३९० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् याम्यद्वितीयपादस्य देहजीवौ घटाङ्गने। रुद्रदिङ्नन्दचन्द्राक्षिश्रामाब्धीषु दशेश्वराः।।६६।। भरणी के दूसरे चरण में कुम्भ देह और कन्या जीव संज्ञक है। ११।१०।९।१।२।३।४।५।६ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।६६।। याम्यतृतीयपादस्य देहजीवौ तुलाङ्गने। सप्ताष्टाङ्कदिगीशार्कगजाद्रिरसराशिपाः।।६७।। भरणी के तीसरे चरण में तुला देह और कन्या जीव संज्ञक होते हैं। ७।८।९।१०।११।१२।८।७।६ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।६७।। देहजीवौ कर्कचापौ चतुर्थचरणे स्मृतौ। वेदबाणाग्निनेत्रेन्दुसूर्येशदशनन्दपाः ।।६८।। भरणी के चौथे चरण में कर्क देह और धन राशि जीवसंज्ञक है। ४।५।३।२।१।१२।११।१०।९ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।६८।। सव्यमेवं विजानीयादपसव्यं तु कथ्यते। द्वादशारं लिखेच्चक्रं तिर्यगूर्ध्वं समानकम्।।६९।। उपर्युक्त सव्य चक्र को कहा, अब अपसव्य चक्र को कह रहा हूँ। १२ कोष्ठ का ऊपर-नीचे चक्र को लिखकर।।६९।। द्वितीयादिषु कोष्ठेषु वृश्चिकाद्व्यस्तमालिखेत्। प्राजापत्यमघेन्द्राग्निं श्रवणं च चतुष्टयम्।।७०।। दूसरे आदि कोष्ठ में वृश्चिकादि उलटे राशियों को लिखे। उसमें रोहिणी, मघा, विशाखा और श्रवण इन चार नक्षत्रों को लिखे।।७०।। धातृवद्दीक्षयेद्देहजीवौ कर्कधनुर्धरौ। नवदिग्रुद्रसूर्येन्दुनेत्राङ्गीष्वब्धिराशिपाः।।७१।। उपर्युक्त चार नक्षत्रों में रोहिणी के समान ही देह-जीव का विचार करना चाहिए। यथा रोहिणी के प्रथम चरण में कर्क देह और धन राशि जीवसंज्ञक है। ९।१०।११।१२।१।२।३।५।४ राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७१।। धातृद्वितीयचरणे तुलास्त्रीदेहजीवकौ। षष्ठसप्ताष्टार्करुद्रा दिगङ्कवसुसप्तपाः।।७२।।