भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 389, कुल 800 में से

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अथ दशाध्यायः ३९१ रोहिणी के दूसरे चरण में तुला देह और कन्या जीव संज्ञक हैं। ६।७।८।१२।११।१०।९।८।७ राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७२।। धातृतृतीयचरणे देहजीवौ कुम्भाङ्गने। षट्बाणाब्धिगुणाक्षीन्दुनन्ददिगुद्रराशिपाः।।७३।। रोहिणी के तीसरे चरण में कुम्भ देह और कन्या जीव संज्ञक है। ६।५।४।३।२।१।९।१०।११ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।७३।। रोहिण्यन्तपदे देहजीवालिझषौ स्मृतौ। सूर्येन्दुद्विगुणेष्वब्धितर्कशैलाष्टराशिपाः।।७४।। रोहिणी के चौथे चरण में वृश्चिक देह और मीन जीव संज्ञक हैं। १२।१।२।३।४।५।६।७।८ राशियों के स्वामी क्रम से दशेश होते हैं।।७४।। चान्द्ररौद्रभगार्य्यममित्रेन्द्रवसुवारुणम्। एतत्ताराष्टकं चैव विज्ञेयं चान्द्रवत्क्रमात्।।७५।। मृगशिरा, आर्द्रा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, अनुराधा, ज्येष्ठा, धनिष्ठा और शतभिषा- इन आठ नक्षत्रों के देह-जीवादि को मृगशिरा के समान समझना।।७५।। देहजीवौ कर्कमीनौ मृगाद्यचरणस्य च। व्यस्तमीनादि कर्कान्तं राशिपाश्च दशाधिपाः।।७६।। मृगशिरा के प्रथम चरण में कर्क देह और मीन राशि जीव संज्ञक हैं। मीन से उलटे कर्क पर्यन्त (१२।११।१०।९।८।७।७।६।५।४) राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७६।। गौर्देहो मिथुनं जीवो इन्दुभस्य द्वितीयेके। त्रिद्वेकाङ्कदिगीशार्कचन्द्रद्विभवनाधिपाः।।७७।। मृगशिरा के दूसरे चरण में वृष देह और मिथुन राशि जीव संज्ञक होती हैं। ३।२।१।९।१०।११।१२।१।२ राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७७।। देहजीवौ नक्रयुग्मे मृगपादे तृतीयके। त्रिबाणाब्धिरसागाष्टसूर्येशदशराशिपाः।।७८।। मृगशिरा के तीसरे चरण में मकर देह और मिथुन राशि जीव संज्ञक होती है। ३।५।४।६।७।८।१२।११।१० राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७८।।

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