बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३९२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् मेषचापौ देहजीवाविन्दुभस्य चतुर्थके। व्यस्तं चापादि मेषान्तं राशिपाश्च दशाधिपाः।।७९।। मृगशिरा के चौथे चरण में मेष देह और धन जीव संज्ञक हैं। धन राशि से मेष पर्यन्त विलोम (९।८।७।६।५।४।३।२।१) राशियों के स्वामी दशेश होते हैं।।७९।। एवं व्यस्ततरे ज्ञेयं देहजीवदशादिकम्। स्पष्टं तवाग्रे कथितं पार्वति प्राणवल्लभे।।८०।। हे पार्वति ! यह अपसव्य चक्र के देह-जीव आदि को तुम्हारे सामने कहा।।८०।। अथ दशावर्षाणि- भूतैकविंशगिरयो नवदिक् षोडशाब्धयः।।८१।। सूर्यादीनां क्रमादब्दाः राशीनां स्वामिनो वशात्।।८१।। ५ । १२ । ७ । ९ । १० । १६ । ४ यह क्रम से सूर्यादि ग्रहों के दशावर्ष राशियों के अधिपति के क्रम से हैं। विशेष चक्र को देखिए।।८१।। चक्रम्- | मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | कं. | तु. | वृ. | ध. | म. | कुं. | मी. | राशयः | | मं. | शु. | बु. | चं. | सू. | बु. | शु. | मं. | बृ. | श. | श. | बृ. | अधिपाः | | ७ | १६ | ९ | २१ | ५ | ९ | १६ | ७ | १० | ४ | ४ | १० | दशावर्षाणि | दशाज्ञानप्रकारमाह- नरस्य जन्मकाले वा प्रश्नकाले यदंशकः। तदादि नवपर्यन्तमायुषं परिचक्षते।।८२।। मनुष्य के जन्मकाल वा प्रश्नकाल में नक्षत्र का जो अंश (चरण) हो उससे आरम्भ करके नव (९) राशियों के वर्ष संख्या तुल्य उस मनुष्य की आयु होती है।।८२।। सम्पूर्णायुर्भवेदादावर्धमंशस्य मध्यमम्। अपमृत्युसमं कष्टमंशान्ते चापरे जगुः।।८३।। अन्य विद्वानों का कहना है कि नक्षत्र के चरण के आदि में जन्म हो तो पूर्णायु, मध्य में आधी और अन्त में कष्ट वा अल्पायु होती है।।८३।।