बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाध्यायः ३९३ नक्ष'चरणतः नवांशज्ञानम्— ज्ञात्वैवं स्फुटसिद्धान्तं राश्यंशं गणयेद्बुधः। अनुपातेन वक्ष्यामि तदुपायमतः परम्।।८४।। इस सिद्धान्त को जानकर राशि के अंश की गणना करना चाहिए। अब मैं अनुपात द्वारा उसके जानने का उपाय कह रहा हूँ।।८४।। गततारा त्रिभिर्भक्ता शेषं चत्वारि संगुणम्। वर्तमानपदेनाढ्यं राशीनामंशको भवेत्।।८५।। गतनक्षत्र संख्या (अश्विनी से जन्मनक्षत्र के पूर्व नक्षत्र की संख्या) को ३ से भाग देने से जो शेष बचे उसे ४ से गुणाकर गुणनफल में जन्मनक्षत्र वा वर्तमान नक्षत्र के वर्तमान चरण संख्या को जोड़ दे। जो संख्या हो वही मेष से गिनने से नवांश होता है।।८५।। उदाहरण— जैसे पुनर्वसु के प्रथम चरण में जन्म है तो गतनक्षत्र (आर्द्रा) संख्या ६ में तीन से भाग देने पर शेष को ४ से गुणाकर उसमें पुनर्वसु के प्रथम चरण की संख्या १ जोड़ने से १० मेष से गिनने से मेष ही का नवांश हुआ। चक्रे राशीनां वर्षयोगसंख्यामाह— मेषगोयमकुलीरराशिषुस्वांशकेषु परमायुरुच्यते। ज्ञानकं १०० मंद ८५ गज ८३ स्त्तदा ८६ क्रमात्त- त्त्रिकोणभवनेषु तद्भवेत्।।८६।। कालचक्र में स्थित मेषादि राशियों से मेषांश में १००, वृषांश में ८५, मिथुनांश में ८३ और कर्कांश में ८६ वर्ष योग वा परमायु होता है। इन राशियों के त्रिकोण (५।९) राशियों में भी यही वर्ष योग होते हैं।।८६।। स्पष्टार्थ चक्रम्—
| मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | कं. | तु. | वृ. | ध. | म. | कुं. | मी. | अंशकाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १०० | ८५ | ८३ | ८६ | १०० | ८५ | ८३ | ८६ | १०० | ८५ | ८३ | ८६ | वर्षयोगः |
| विशेष— यहाँ ज्ञानकं मंदगज आदि शब्दों से 'कटपयवर्गभवैरिहः | ||||||||||||
| अंकाः' इत्यादि के अनुसार अंकों को समझना चाहिए। |