भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 405, कुल 800 में से

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पृष्ठ 405

अथ दशाध्यायः ४०७ यदि बहुत से ब्रह्मा होते हों तो सबमें जिसका अधिक अंश हो वही ब्रह्मा होता है। यदि उसके साथ राहु हो तो अल्प अंश वाला ही ब्रह्मा होता है॥४१॥ कारकादष्टमस्थस्तथा चाष्टमेश्वरो ग्रहः। तयोर्मध्ये च बलवान्ब्रह्मग्रहः सुनिश्चितम्॥४२॥ कारक से आठवें भाव में वा अष्टमेश दोनों में जो बली हो वही ब्रह्मा होता है॥४२॥ उदाहरण— पीछे दिये हुए जन्मांग में षष्ठेश, अष्टमेश और व्ययेश, बुध, सूर्य और गुरु में बली गुरु ही है, अतः वही ब्रह्मग्रह हुआ। ब्रह्मग्रह विषमराशि सिंह में है, अतः सिंह से क्रम गणना के अनुसार दशा का आरम्भ हुआ। यदि कारक से अष्टमेश ले तो आत्मकारक भौम (पृ. ९७ देखो) से अष्टमेश बुध भी सिंह ही राशि विषम में है, अतः सिंह से ही क्रम गणना से दशा का आरम्भ हुआ। यहाँ आत्मकारक से दशा का आरम्भ लेना चाहिए। अथ स्थिरदशाचक्रम्—

बृ. बु.श.ल.मं.शु.<br>चं.सू.ग्रहाः
१०१११२राशयः
वर्षाणि
२०१३२१२७३४४२५१६१७२८४८५८७९०२-९४
<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८<br>१८सूर्यः

इति स्थिरदशा। अथ ब्रह्मदशामाह— ओजलग्ने यदा जन्म विधेराश्रितराशितः। स्वराशेः षष्ठेशपर्यन्तमङ्‌कास्तु सदा द्विज॥४३॥ यदि विषमलग्न में जन्म हो तो ब्रह्मग्रहाश्रित राशि से दशा का आरम्भ क्रम से होता है और राशियों के दशा का वर्ष उस राशि से छठी राशि के स्वामी पर्यन्त संख्या होती है॥४३॥