बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 419, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाध्यायः । . . ४२१ आदि (इच्छा, राग, द्वेष, अभिनिवेश, अहंकार) पांच शक्तियां ।।१००।। मायाद्याश्चक्रभेदाश्च धराद्या भूतपञ्चकम् । शकादि विषयास्ते च कामबाणा इतीरिताः ॥१०१॥ प्रभवादि क्रमेणैषां स्वराणामश्वरादिकः । उदयोद्वादशाब्दानां प्रत्येकं द्वादशाब्दकाः ॥१०२॥ माया आदि (माया, अविद्या, तामिस्र अंधतामिस्र, मोह) पांच चक्र, धरा आदि (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश) पांच महाभूत, और शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध, पांच विषय ये सभी पञ्चक काम के बाण हैं। इसी प्रकार से प्रभवादि संवत्सर भी १२ वर्ष भोग तुल्य पांच स्वरों के होते हैं। प्रत्येक स्वरों का १२ वर्ष होता है।।१०१-१०२।। उदाहरण-पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म होने से नाम का प्रथम अक्षर ककार है वह चक्र में अकार स्वर के नीचे है अतः अकार स्वर से दशा आरम्भ होगा। शेष चक्र से स्पष्ट है।
अथपंचस्वरचक्रम्
| अ. | इ. | उ. | ऐ. | ओ | स्वराः |
|---|---|---|---|---|---|
| १२ | १२ | १२ | १२ | १२ | वर्ष |
| क. | ख. | ग. | घ. | च. | |
| छ. | ज. | झ. | ट. | ठ. | |
| ड. | ढ. | त. | थ. | द. | वर्षाः |
| ध. | न. | प. | फ. | ब. | |
| भ. | म. | य. | र. | ल. | |
| व. | श. | ष. | स. | ह. |
पंचस्वरदशाचक्रम्
| अ. | इ. | उ. | ए. | ओ | स्वराः |
|---|---|---|---|---|---|
| १२ | १२ | १२ | १२ | १२ | वर्ष |
| २०१३ | २५ | ३७ | ४९ | ६१ | ७३ |
| ३ | ३ | ||||
| १८ | १८ |
इतिपंचस्वरदशा। अथयोगिनीदशामाह- मङ्गला पिङ्गला धान्या भ्रामरी भद्रिका तथा । योगिन्यष्टौ समाख्याताउल्का सिद्धाच संकटा ॥१०३॥ मङ्गला, पिङ्गला, धान्या, भ्रमरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा, संकटा, ये आठ योगिनी होती हैं।।१०३।। पिङ्गलातो भवेत्सूर्यो मङ्गलातो निशाकरः । भ्रामरीतो भवेद्भौमो भद्रिकातो बुधस्तथा ॥१०४॥