भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 427, कुल 800 में से

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पृष्ठ 427

अथ दशाफलाध्यायः । ४२९ यदि चन्द्रमा अपने उच्चराशि में होकर केन्द्र व त्रिकोण में हो शुभग्रह से युक्त शुक्लपक्षीय चन्द्र हो और बली हो ।। १३ ।। कर्मभाग्याधिपे चन्द्रेसुखेशेन बलैर्युते । आद्यन्तैश्चोरुभाग्येन धन धान्यादिलाभकृत् ।।१४।। कर्मेश वा भाग्येश हो और बली चौथे भाव के स्वामी से युत हो तो प्रथम अवस्था और अन्तिम अवस्था में अत्यंत भाग्योदय, धन, का लाभ होता है।।१४।। गृहे तु शुभकार्याणि वाहनं राजदर्शनम् । यत्नकार्यार्थसिद्धिःस्याद्गृहे लक्ष्मीकटाक्षकृत् ।।१५।। गृह में शुभकार्य होते हैं, वाहन का लाभ, राजा का दर्शन, यत्न, कार्य और धन की सिद्धि, गृह में लक्ष्मी की प्रसन्नता ।।१५।। मित्रप्रभुवशाद्भाग्यं राज्यलाभं महत्सुखम् । अश्वांदोल्यादिलाभं च श्वेतवस्त्रादिलाभकृत् ।।१६।। मित्र और स्वामी के द्वारा भाग्योदय राज्यसुख का लाभ, अश्व, सवारी का लाभ, सफेदवस्त्र का लाभ।।१६।। पुत्रलाभादिसंतोषं गृहगोधनसंकुलम् । धनस्थानगते चन्द्रे तुंगे स्वक्षेत्रगेऽपि वा ।।१७।। पुत्रलाभ, गौओं की वृद्धि होती है। यदि चन्द्रमा अपने उच्च वा अपनी राशि का होकर दूसरे भाव में हो तो ।।१७।। अनेकधनलाभंच भाग्यवृद्धिर्महत्सुखम् । निक्षेपराजसन्मानं विद्यालाभं च विंदति ।।१८।। अनेक प्रकार के धन का लाभ, भाग्योदय और अत्यंत सुख, राजा से सम्मान और विद्या का लाभ होता है।।१८।। नीचे वा क्षीणचन्द्रे वा धनहानिर्भविष्यति । दुश्चिक्ये बलसंयुक्ते क्वचित्सौख्यं क्वचिद्धनम् ।।१९।। दुर्बले पापसंयुक्ते देहजाड्यं मनोरुजम् । भृत्यपीडा वित्तहानिर्मातृवर्गजनाद्धधः ।।२०।। यदि चन्द्रमा नीच राशि में हो वा क्षीण हो तो धन की हानि होती है। यदि तीसरे स्थान में चन्द्रमा बली हो तो कभी सुख और कभी धन का लाभ होता है।।२०।।