भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 800 में से

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लग्नाध्यायः ४५ ओजराशौ द्वयं लब्धं तथा द्वौ समराशिगौ । साजात्ये योजनं कार्यं जायते वर्णदा दशा ।। ३३ ।। यदि दोनों विषम राशि में अथवा दोनों समराशि में हों तो दोनों के सजातीय होने से दोनों का योग करने से वर्णद दशा होती है ।। ३३ ।। वैजात्ये पूर्ववत्कार्याधिक्ये न्यूनं विशोधयेत् । मेषादि सव्यमार्गेण गणनीयं प्रयत्नतः ।। ३४ ।। दोनों विजातीय हों तो पूर्ववत् विषम में न्यून को घटाकर मेषादि से सव्यमार्ग से गणना करना चाहिए ।। ३४ ।। यल्लब्धमन्तिमो राशिस्तद्राशिर्वर्णदो भवेत् । वर्षसंख्या विजानीयात् चरपर्याप्रमाणतः ।। ३५ ।। जो लग्न से अंतिम राशि हो वही वर्णद राशि होती है। वही वर्णद संख्या चराति क्रम से होती है ।। ३५ ।। होरालग्नभयोर्नेया दुर्बला वर्णदा दशा । यत्संख्या वर्णदा लग्नात्तत्र संख्या क्रमेण तु ।। ३६ ।। होरालग्न से आई हुई वर्णद दशा दुर्बल होती है, वहाँ पर जन्मलग्न से लाई हुई दशा की संख्या लेनी चाहिए ।। ३६ ।। क्रमव्युत्क्रमभेदेन दशा स्यात् पुरुषस्त्रियोः । वर्णदा राशिमेषादि मीनादि गणयेत्क्रमात् ।। ३७ ।। क्रम-उत्क्रम भेद से पुरुष और स्त्री की दशा होती है। और वर्णद राशि मेषादि और मीनादि से गिनना चाहिए ।। ३७ ।। फलविचारमाह– वर्णदात्स्यात् त्रिकोणे च पापयुक् पापराशिकः । पापयोगकृते विप्र दशापर्यन्तजीवनम् ।। ३८ ।। हे विप्र ! वर्णद राशि से त्रिकोण में पापग्रह की युति हो अथवा पापग्रह की राशि हो, उसमें पापग्रह की युति हो तो उसके दशा पर्यन्त आयु होती है ।। ३८ ।। रुद्रशूले यथैवायुर्निर्विशङ्कं द्विजोत्तम । तथैव वर्णदादप्यायुश्चिन्त्यं द्विजोत्तम ।। ३९ ।। जिस प्रकार रुद्रशूल पर्यन्त आयु होती है उसी प्रकार वर्णद से भी आयु का विचार करना चाहिए ।। ३९ ।।

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