बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाफलाध्यायः । ४३५ धनधान्यादिलाभश्च सत्कीर्त्तिधनसम्पदाम् । ज्ञानाधिक्यं नृपप्रीति सत्कर्मगुणवर्धनम् ।।५४।। धन, धान्य आदि का लाभ, कीर्ति, धन सम्पत्ति की वृद्धि, ज्ञान की वृद्धि, राजा से प्रीति, अच्छे कर्म और गुण में वृद्धि।।५४।। पुत्रदारादिसौख्यंच देहारोग्यं महत्सुखम् । क्षीरेण भोजनं सौख्यं व्यापारेण धनागमम् ।।५५।। पुत्र-स्त्री का सुख, शरीर की आरोग्यता, सुख, दूध का भोजन, सुख व्यापार से लाभ होता है।।५५।। शुभदृष्टियुते सौम्ये भाग्ये कर्माधिपे यदा । आधिपत्ये बलवती सम्पूर्ण फलदायिका ।।५६।। बुध शुभग्रह से दृष्ट युत हो, भाग्य स्थान में हो, कर्मेश हो तो प्रोक्ति सभी फल सम्पूर्ण होते हैं।।५६।। पापग्रहयुतेदृष्टे राजद्वेषं मनोरुजम् । वन्धुजन विरोधं च विदेशगमनं तथा ।।५७।। बुध पापग्रह से युत दृष्ट हो तो राजा से द्वेष, मानसिक कष्ट, बन्धुओं से विरोध, विदेशयात्रा।।५७।। परप्रेष्यं च कलहं मूत्रकृच्छ्रान्महद्भयम् । षष्ठाष्टमव्यये सौम्ये लाभभोगविनाशनम् ।।५८।। दूसरे की दासता, कलह मूत्रकृच्छ्र (सुजाक) का भय होता है। ३, ८, १२ भाव में बुध हो तो लाभ आदि की हानि होती है।।५८।। वातपीडां धनं चैव पाण्डुरोगं तथैव च । नृपचौराग्निभीतिंच कृषिगोभूमिनाशनम् ।।५९।। वात पीडा, पाण्डुरोग, राजा, चोर से भय, कृषि, गौ तथा भूमि की हानि होती है।।५९।। दशादौ धनधान्यं च विद्यालाभं महत्सुखम् । पुत्रकल्याणसम्पत्तिः सन्मार्गे धनलाभकृत् । मध्ये नरेन्द्रसन्मानमंते दुःखं भविष्यति ।।६०।। दशा के आदि में धन, धान्य, विद्या का लाभ और सुख होता है। पुत्र प्राप्ति होती है सन्मार्ग में धन का व्यय होता है। मध्य में राजा से सन्मान का लाभ और अंत में दुःख होता है।।६०।। इति बुधदशाफलम्।