बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 458, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें४६० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । ग्रामांतर की यात्रा, ब्राह्मण, राजा का दर्शन, राज्य का लाभ, महाउत्सव, छत्र, चामर आदि वैभव का लाभ।।८३।। गृहे कल्याण सम्पत्तिर्नित्यं मिष्टान्नभोजनम् । विद्रुमादिरत्नलाभं मुक्तावस्त्रादिलाभकृत् ।।८४।। गृह में नित्यं कल्याण और सम्पत्ति तथा मिष्टान्न का भोजन होता है। मूंगा आदि रत्न का लाभ, मोती, वस्त्र का लाभ।।८४।। चतुष्पाज्जीवलाभः स्याद्बहुधान्यधनादिकम् । उत्साहं कीर्त्तिसम्पत्तिर्नरवाहनसम्पदाम् ।।८५।। चतुष्पद जीव का लाभ, बहुत धन, धान्य का लाभ, उत्साह, कीर्त्ति, सम्पत्ति, मनुष्य की सवारी का लाभ होता है।।८५।। षष्ठाष्टमव्यये शुक्रे दायेशाद्बलवर्जिते । राजकोपं मनः क्लेशं पुत्रस्त्रीधननाशनम् ।।८६।। दशेश से ६।८।१२ वें शुक्र हो और निर्बल हो तो राजकोप, मनमें कष्ट, पुत्र, स्त्री और धन का नाश होता है।।८६।। भुक्त्यादौ मध्यमं मध्ये लाभः शुभकरोभवेत् । अन्तेयशोनाशनं च स्थानभ्रंशमथापिवा ।।८७।। अन्तर के आरम्भ में मध्यम फल, मध्य में लाभ और शुभ तथा अन्त में यश की हानि, स्थान की हानि होती है।।८७।। बन्धुद्वेषमनन्तं च श्वकुलाद्भोग नाशनम् । भार्गवे द्यूननाथेतु देहे जाड्यं मनोरुजम् ।।८८।। बन्धुओं से द्वेष, अपने ही कुल से सुख की हानि होती है शुक्र सातवें भाव का स्वामी हो तो देह में जड़ता होती है और मानसिक कष्ट होता है।।८८।। रन्ध्ररिष्फसमायुक्ते अपमृत्युर्भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं मृत्युञ्जयजपं चरेत् । श्वेतां गां महिषीं दद्याद्रुद्र जाप्यं च कारयेत् ।।८९।। यदि ८।१२ वें में हो तो अपमृत्यु का भय होता है। शान्ति के लिये सफेद गौ, भैंस का दान, मृत्युंजय का और रुद्राध्याय का जप कराना चाहिये।।८९।। इति सूर्यान्तर्दशाफलम्।