बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४६१ अथ चन्द्रदशायांचन्द्रान्तर्दशाफलम् - स्वोच्चे स्वक्षेत्रगे चन्द्रे त्रिकोणे लाभगेऽपिवा । भाग्यकर्माधिपैर्युक्ते गोजाश्वाम्बरसंकुलम् ।।९०।। चन्द्रमा की दशा में अपनी उच्चराशि वा अपनी राशि में गये हुये केन्द्र वा त्रिकोण में वा लाभस्थानगत भाग्येश कर्मेश से युक्त चन्द्रमा का अन्तर हो तो गौ, बकरी, घोड़ा वस्त्र का लाभ।।९०।। देवतागुरुभक्तिश्च पुण्यश्लोकादि कीर्त्तनम् । राज्यलाभं महत्सौख्यं यशोवृद्धिः सुखावहा ।।९१।। देवता गुरु की भक्ति, पुण्यप्रद श्लोकों का पाठ, राज्यलाभ, सुखयश में वृद्धि होती है।।९१।। पूर्णचन्द्रे पूर्णबले सेनाधिपमहत्सुखम् । पापयुक्तेऽथवा चन्द्रे नीचे वा रिष्फषष्ठगे ।।९२।। चन्द्रमा पूर्ण हो और पूर्णबली हो तो सेनाधिपति ऐसा अधिकार और बड़ा सुख होता है।।९२।। चन्द्रमा पापग्रह से युक्त हो वा नीच राशि में हो वा १२।८ भाव में हो तो।।९२।। तत्काले धननाशः स्यात्स्थानच्युतिमथापिवा । देहालस्यं मनस्तापं राजमन्त्रिविरोधकृत् ।।९३।। धन का नाश और स्थानच्युति देह में आलस्य, मन में सन्ताप, राजमन्त्री से विरोध।।९३।। मातृक्लेशं मनोदुःखं निगडं बन्धुनाशनम् । द्वितीयद्यूननाथेतुं , रन्ध्ररिष्फसमन्विते ।।९४।। माता को कष्ट, दुख, बन्धन और बन्धुओं की हानि होती है। चन्द्रमा २ वा ७ भाव का स्वामी हो और ८ या १२ भाव में हो तो।।९४।। देहजाड्यं महाभङ्गमपमृत्योर्भयं भवेत् । श्वेतांगां महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यताभवेत् ।।९५।। शरीर में जड़ता, और अप मृत्यु का भय होता है। आरोग्यता के लिये सफेद गौ, भैंस का दान करना चाहिये।।९५।।