बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । पुत्र का लाभ कल्याण तथा राजा के अनुग्रह से वैभव का लाभ होता है ६।८।१२ स्थान में अपनी नीच राशि वा २ रे भाव में शनि हो तो।।१२३।। तद्वृत्त्यादौ पुण्यतीर्थे स्नानं चैव तु दर्शनम् । अनेकजनत्रासश्च शस्त्रपीडा भविष्यति ।।१२४।। उसके अन्तर के आरम्भ में पुण्यतीर्थ का स्नान और दर्शन होता है। अनेक लोगों का भय तथा हथियार से पीड़ा होती है।।१२४।। दायेशात्केन्द्रराशिस्ये त्रिकोण वलगेऽपि वा । क्वचित्सौख्यं धनाप्तिश्चदारपुत्रविरोधकृत् ।।१२५।। दशेश से केन्द्र या त्रिकोण में बली हो तो कभी सुख धन का लाभ, स्त्री पुत्रादि से विरोध होता है।।१२५।। द्वितीयद्यूनरन्ध्रस्थे देहबाधा भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं मृत्युंजयजपं चरेत् । कृष्णां गां महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यमादिशेत् ।।१२६।। २।७।८ भाव में हो तो देह में रोगादि का भय होता है। इस दोष के शान्त्यर्थ मृत्युंजय का जप, काली गौ, भैंस का दान करने से आरोग्यता होती है।।१२६।। अथचन्द्रदशायांबुधान्तर्दशाफलम् - चन्द्रस्थान्तर्गते सौम्ये केन्द्रलाभत्रिकोणगे । स्वर्क्षे नवांशके सौम्ये तुङ्गे वा बलसंयुते ।।१२७।। चन्द्रमा की दशा में अपनी राशि, वा अपने नवांश वा अपनी उच्चराशि में बलवान्। बुध केन्द्र वा त्रिकोण में हो तो उसके अन्तर में।।१२७।। धनागमं राजमानं प्रियवस्त्रादिलाभकृत् । विद्याविनोदसङ्गोष्ठी ज्ञानवृद्धिः सुखावहा ।।१२८।। धन का आगमन, राज्यलाभ, प्रियवस्त्रों का लाभ होता है। विद्या विनोद, अच्छी सभा, ज्ञान में वृद्धि, सुख।।१२८।। सन्तानप्राप्ति सन्तोषं वाणिज्याद्धनलाभकृत् । वाहनच्छत्रसंयुक्तं नानालंकारभूषितम् ।।१२९।। सन्तान का लाभ, सन्तोष, व्यापार से धन का लाभ, वाहन, छत्र से युक्त अनेक आभूषणों का लाभ होता है।।१२९।।