बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६८- \qquad बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । दायेशात्केन्द्रलाभे वा त्रिकोणे बलसंयुते । क्वचित्फलं दशादौ तु दारसौख्यंसुखावहम् ।।१३७।। दशेश से केन्द्र या एकादश वा त्रिकोण में बलवान् हो तो कभी दशा के आरंभ में ही स्त्री को सुख आदि शुभ फल होते हैं।।१३७।। गोमहिष्यादिलाभं च भुक्त्यन्ते चाथनाशनम् । पापयुक्तेऽथवा दृष्टे दायेशाद्रन्ध्ररिष्फगे ।।१३८।। गौ भैंस आदि का लाभ तथा दशा के अन्त में धन की हानि होती है। पापग्रह से युक्त वा दृष्ट हो और दशेश से २ या १२ भाव में हो तो।।१३८।। हीनशत्रुत्वकार्याणि अकस्मात्कलहं ध्रुवम् । द्वितीयद्यूनराशिस्थे अनारोग्यं महद्भयम् । मृत्युञ्जयजपं प्रकुवीते सर्वसम्पत्प्रदायकम् ।।१३९।। हीन कार्य शत्रुता करने वाले कार्य को करता है और अकस्मात् झगड़ा होता है। २ रे ये ७ वें भाव में हो तो कष्ट और बड़ा भय होता है। मृत्युंजय का जप कराने से सब प्रकार के सुख का अनुभव होता है।।१३९।। चन्द्रस्यान्तर्गते शुक्रे केन्द्रलाभत्रिकोणगे । स्वोच्चे स्वक्षेत्रगे वापि राज्यलाभं करोति च ।।१४०।। यदि चन्द्रमा की दशा में केन्द्र या त्रिकोण वा अपने उच्चराशि अपने राशि में गये हुये शुक्र का अन्तर हो तो राज्यलाभ होता है।।१४०।। महाराजप्रसादेन वाहनाम्बरभूषणम् । चतुष्पाज्जीवलाभं स्याद्दारपुत्रादिवर्धनम् ।।१४१।। नूतनागारनिर्माणं नित्यं मिष्टान्नभोजनम् । सुगन्धपुष्पदायादिरम्यस्त्र्यारोग्यसम्पदाम् ।।१४२।। महाराजा की प्रसन्नता से वाहन, वस्त्र, आभूषण का लाभ, चतुष्पद जीव का लाभ, स्त्री पुत्रादि की वृद्धि। नूतन मकान का निर्माण होता है, नित्य मिठाई खाने को प्राप्त होती है। सुगन्धित पुष्प, दायाद, सुन्दर स्त्री, आरोग्यता और सम्पत्ति का लाभ होता है।।१४२।। दशाधिपेन संयुक्ते देहसौख्यं महत्सुखम् । सत्कीर्त्तिर्मुखसम्पत्तिर्गृहक्षेत्रादि वृद्धिकृत् ।।१४३।।