भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४७७ दारपुत्रादिविभवं गृहेलक्ष्मीकटाक्षकृत् । दायेशात्षष्ठरिःफस्थे रन्ध्रे वा पापसंयुते ।।१९७।। स्त्री, पुत्र आदि का सुख और गृह में लक्ष्मी का प्रवेश होता है। दशेश से ६।१२।८ स्थान में पापग्रह से युत हो तो।।१९७।। तद्दाये मानहानिस्यात्क्रूरबुद्धिस्तु क्रूरवाक् । चौराग्निनृपपीडा च मार्गे चौरभयादिकम् ।।१९८।। बुध के अन्तर में मानहानि, दुष्टबुद्धि होती है कटुवचन, चोर, अग्नि, राजा से पीडा, मार्ग में चोरों का भय।।१९८।। अकस्मात्कलहश्चैव बुधभुक्तौ न संशयः । द्वितीयद्यूननाथेतु महाव्याधिर्भयंकरा ।।१९९।। अकस्मात् कलह होता है इसमें संशय नहीं है। यदि बुध २।१२ भाव का स्वामी हो तो महाभयंकर व्याधि होती है।।१९९।। अश्वदानं प्रकुर्वीत विष्णोर्नामसहस्रकम् । सर्वसम्पत्प्रदं सौख्यं सर्वारिष्टप्रशांतिदम् ।।२००।। इसके शान्त्यर्थ अश्वदान करना चाहिये और विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से सभी प्रकार की सम्पत्तियों का लाभ और सभी अरिष्टों का नाश होता है।।२००।। अथ भौमदशायांकेन्वन्तर्दशाफलम्- कुजस्यान्तर्गते केतौ त्रिकोणे केन्द्रगेऽपि वा । दुश्चिक्ये लाभगे वापि शुभयुक्ते शुभेक्षिते ।।२०१।। भौम की दशा में त्रिकोण वा ३ वा ११ भाव में गये हुये शुभग्रह से युक्त दृष्ट केतु के अन्तर में।।२०१।। राजानुग्रहशान्तिश्च बहुसौख्यं धनागमम् । किञ्चित्फलं दशादौ तु भूलाभं पुत्र लाभकृत् ।।२०२।। राजा की कृपा से शान्ति और बहुत सुख की प्राप्ति, धन का आगमन होता है। कुछ फल दशा के आदि में होता है बाद में भूमि लाभ, पुत्र का लाभ होता है।।२०२।। राजसंलाभकार्याणि चतुष्पाज्जीवलाभकृत् । योगकारकसंस्थाने बलवीर्यसमन्विते ।।२०३।।