बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४७६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । नीतिमार्गप्रसङ्गश्च नित्यं मिष्टान्नभोजनम् । वाहनाम्बरपश्वादिराजकर्म सुखानि च ॥१९०॥ नीति मार्ग का अवलम्बन और नित्य मिष्टान्न का भोजन, वाहन, वस्त्र, पशु का लाभ, राजकार्य में व्यस्त और सुख॥१९०॥ कृषिकर्मफलं सिद्धिर्वारणाम्बरभूषणम् । नीचे वास्तंगते वापि षष्ठाष्टव्ययगेऽपि वा ॥१९१॥ कृषि कर्म में प्रवृत्ति और भूषणादि तथा वाहन की प्राप्ति होती है। यदि बुध नीच वा अस्त हो अथवा ६।८।१२ भाव में हो तो॥१९१॥ हृद्रोगं मानहानिश्च निगडं बन्धुनाशनम् । दारपुत्रार्थनाशः स्याच्चतुष्पाज्जीवनाशनम् ॥१९२॥ हृदय रोग, धन की हानि, बंधन, बन्धुओं की हानि, स्त्री पुत्र चतुष्पद का नाश होता है॥१९२॥ दशाधिपेन संयुक्ते शत्रुबुद्धिर्महद्भयम् । विदेशगमनं चैव नानारोगस्तथैव च ॥१९३॥ दशेश से युक्त हो तो शत्रुता की वृद्धि, और भय, विदेशयात्रा, अनेक रोग॥१९३॥ राजद्वारे विरोधश्च कलहः सौम्यमुक्तिषु । दायेशात्केन्द्रकोणे वा स्वोच्चे युक्तार्थलाभकृत् ॥१९४॥ राजा से विरोध और कलह होता है। दशेश से केन्द्र वा अपने उच्च में हो तो धन का लाभ॥१९४॥ अनेकधननाथत्वं राजसन्मानमेव च । भूपालयोगं कुरुते धनाम्बरविभूषणम् ॥१९५॥ अनेक धनी संस्थाओं का स्वामी। राजा से सम्मान, राजयोग का सुख, धन- वस्त्र आभूषण का लाभ॥१९५॥ भूरिवाद्यमृदङ्गादि सेनापत्यं महत्सुखम् । विद्याविनोदविमला वस्त्रवाहनभूषणम् ॥१९६॥ बहुत से बाजों मृदङ्ग आदि का सुख सेनापतित्व और बड़ा सुख, विद्या का विनोद, वस्त्र, वाहन आभूषण॥१९६॥