बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४७९ आयुषो वृद्धिंरैश्वर्यं भाग्यवृद्धिसुखं भवेत् । दायेशात्केन्द्रलाभस्थे कोणेवा धनगेऽपि वा ॥२१०॥ आयुष्य की वृद्धि, ऐश्वर्य और भाग्यवृद्धि तथा सुखं होता है। दशेश से केन्द्र लाभ, त्रिकोण वा धन स्थान में हो तो।।२१०।। तत्काले श्रियमाप्नोति पुत्रलाभं महत्सुखम् । स्वप्रभोश्च महत्सौख्यं श्वेतवस्त्रादिलाभकृत् ॥२११॥ तत्काल लक्ष्मी की प्राप्ति पुत्र का लाभ और बहुत सुख होता है। अपने स्वामी की कृपा से बड़ा सुख सफेद वस्त्र आदि का लाभ होता है।।२११।। महाराजप्रसादेन ग्रामभूम्यादिलाभदम् । मुक्त्यन्ते फलमाप्नोतिगीतनृत्यादिलाभकृत् ॥२१२॥ राजा की कृपा से ग्राम, भूमि आदि का लाभ होता है, दशा के अन्त में गती, नृत्य आदि का सुख ।।२१२।। पुण्यतीर्थस्नानलाभं कर्माधिपसमन्विते । दानधर्मदयापुण्यं तडागं कारयिष्यति ॥२१३॥ पुण्यतीर्थ में स्नान का लाभ होता है। कर्मेश से युक्त हो तो दान, धर्म, दया, पुण्य होता है और तालाब आदि को बनवाता है।।२१३।। दायेशाद्रन्ध्ररिःफस्थे षष्ठे वा पापसंयुते । करोति दुःखबाहुल्यं देहपीडां धनक्षयम् ॥२१४॥ दशेश से ८।१२।६ स्थान में पापग्रह से युत हो तो अत्यन्त दुःख, शरीर में पीड़ा, धन का नाश।।२१४।। राजचौरादिभीतिश्च गृहे कलहमेव च । दारपुत्रादिपीडा च गोमहिष्यादिनाशकृत् ॥२१५॥ राजा, चोर का भय, घर का कलह, स्त्री पुत्रादि को कष्ट, गौ, भैंस आदि का नाश होता है।।२१५।। द्वितीयद्यूननाथे तु देहबाधा भविष्यति । श्वेतां गां महिषीं दद्यादायुरारोग्यप्राप्तये ॥२१६॥ २।७ भाव का स्वामी हो तो शरीर की बाधा होती है। इसकी शान्ति के लिये सफेद गौ सफेद भैंस का दान करना चाहिये।।२१६।।