भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४८१ करोति विपुलं राज्यं गन्धमाल्याम्बरीदिकम् । तडागं गोपुरादीनां पुण्यधर्मादिसंग्रहम् ॥२२४॥ बड़े राज्य का गंध, माल्य वस्त्रादि के साथ लाभ होता है, तालाब किला आदि का निर्माण होता है, पुण्य धर्म आदि होते हैं॥२२४॥ विवाहोत्सवकर्माणि दारपुत्रादिसौख्यकृत् । पितृमातृसुखप्राप्तिं गृहे लक्ष्मीकटाक्षकृत् ॥२२५॥ विवाहादि उत्सव होता है। स्त्री पुत्रादि का सुख होता है, पिता-माता का सुख होता है और गृह में लक्ष्मी का वास होता है॥२२५॥ महाराजप्रसादेन इष्टसिद्धिसुखादिकम् । पूर्णचन्द्रे पूर्णफलं क्षीणे स्वल्पफलं भवेत् ॥२२६॥ राजा की प्रसन्नता से अभीष्ट की सिद्धि होती है पूर्ण चन्द्रमा हो तो पूर्णफल और क्षीणचन्द्र हो तो अल्प फल होता है॥२२६॥ नीचारिस्थेऽष्टमे व्यये दायेशाद्रिपुरंध्रके । मरणं दारपुत्राणां कष्टं भूमतिनाशनम् ॥२२७॥ यदि चन्द्रमा नीच राशि. में ६।८।१२ भाव में वा दशेश से ६।८ भाव में हो तो अपने अन्तर में स्त्री पुत्र का मरण और भूमि की हानि होती है॥२२७॥ पशुधान्यक्षयं चैव चौरादिरणभीतिकृत् । द्वितीयद्यूननाथे तु ह्यपमृत्युर्भविष्यति ॥२२८॥ पशु, धान्य का नाश चौर आदि का और संग्राम का भय होता है। २।७ भाव का स्वामी हो तो अकाल मृत्यु होती है॥२२८॥ देहजाड्यं मनोदुःखं दुर्गालक्ष्मीजपं चरेत् । श्वेतां गां महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यमादिशेत् ॥२२९॥ देह जड़ता और मानसिक दुःख होता है। शान्ति के लिये दुर्गा और लक्ष्मी का जप, सफेद गौ और भैंस का दान कराना चाहिये इसके करने से आरोग्यता होती है॥२२९॥ • इति कुजदशायामन्तर्दशाफलम्। अथ राहुदशायांराह्वन्तर्दशाफलम्- कुलीरे वृश्चिके चैव कन्यायां वा चापगेहगेऽगौ । तद्भुक्तौ राजसन्मानं वस्त्रवाहनभूषणम् ॥२३०॥