भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 484

४८६ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । द्वितीयद्यूननाथे तु ह्यपमृत्युर्भविष्यति । कृष्णां गां महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यमादिशेत् ।।२५७।। २।७ भाव का स्वामी हो तो अपमृत्यु का भय होता है। काली गौ और भैंस के दान करने से आरोग्यता का लाभ होता है।।२५७।। अथराहुदशायां बुधान्तर्दशाफलम्- राहोरन्तर्गते सौम्ये भाग्ये वा स्वक्षगेऽपिवा । तुङ्गे वा केन्द्रराशिस्थे पुत्रे वा लाभगेऽपिवा ।।२५८।। राहु की दशा में भाग्य (९) वा अपनी राशि, अपने उच्च, केन्द्र, पंचम वा एकादश में गये हुये।।२५८।। राजयोगं प्रकुरुते गृहे कल्याणवर्धनम् । व्यापारेण धनप्राप्तिर्विद्यावाहनमुत्तमम् ।।२५९।। बुध के अन्तर में राजयोग का उदय, नित्य कल्याण की वृद्धि, व्यापार से धन लाभ, विद्या और वाहन का लाभ, विवाहोत्सव आदि कार्य, चतुष्पदों का लाभ होता है।।२५९।। विवाहोत्सवकार्याणि चतुष्पाज्जीवलाभकृत् । सौम्यमासे महत्सौख्यं स्ववारे राजदर्शनम् ।।२६०।। बुध के मास में महासुख और बुध के दिन राजा का दर्शन।।२६०।। सुगन्धपुष्पशय्यादिस्त्रीसौख्यं चातिशोभनम् । महाराजप्रसादेन धनलाभो महद्यशः ।।२६१।। सुगन्ध पुष्प, शय्या, और स्त्री का सुख होता है, महाराज के प्रसाद से धन का लाभ और बड़ा यश होता है।।२६१।। दायेशात्केन्द्रलाभे वा दुश्चिक्येः भाग्यकर्मगे । देहारोग्यं हृदुत्साहं इष्टसिद्धिः सुखावहा ।।२६२।। दशेश से केन्द्र वा लाभ वा तीसरे वा ९।१० भाव में बुध शरीरारोग्यता, हृदय में उत्साह, इष्टसिद्धि और सुख होता है।।२६२।। पुण्यश्लोकादिकीर्त्तिश्च पुराणश्रवणादिकम् । विवाहो यज्ञदीक्षा च दानधर्मदयादिकम् ।।२६३।। पुण्य-श्लोक, कीर्ति और पुराण श्रवण, विवाह, यज्ञ-दीक्षा दान-धर्म दया आदि होता है।।२६३।।