बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४८९ सम्मानं राजसन्मानं राज्यलाभं महत्सुखम् । स्वोच्चे वा स्वर्शगे वापि तुङ्गांशे स्वांशगेऽपिवा ।।२७७।। सम्मान, राजा से आदर, राज्य सुख का लाभ होता है। यदि शुक्र अपने उच्च वा अपनी राशि में, उच्चांश में वा अपने नवांश में हो ।।२७८।। नूतनगृहनिर्माणं नित्यं मिष्ठान्नभोजनम् । कलत्रपुत्रविभवं मित्रसंयुक्तभोजनम् ।।२७८।। नूतन गृह का निर्माण, नित्य मिठाई का भोजन, स्त्री, पुत्र वैभव और मित्रों के साथ भोजन होता है।।२७८।। अन्नदानप्रियं नित्यं दानधर्मादिसंग्रहम् । महाराजप्रसादेन वाहनाम्बरभूषणम् ।।२७९।। अन्नदान तथा अन्य धार्मिक क्रियायें और महाराज की प्रसन्नता से वाहन- वस्त्र आभूषण का लाभ।।२७९।। व्यवसायात्फलाधिक्यं विवाहो मौंजिबंधनम् । षष्ठाष्टमव्यये शुक्रे नीचे शत्रुगृहेस्थिते ।।२८०।। व्यवसाय से अधिक लाभ और विवाह यज्ञोपवीत आदि उत्सव होते हैं। यदि शुक्र ६।८।१२ भाव में हो नीच में वा शत्रु गृह में हो।।२८०।। मन्दारफणिसंयुक्ते तद्भुक्तौ रोगमादिशेत् । अकस्मात्कलहं चैव पितृपुत्रवियोगकृत् ।।२८१।। शनि, भौम,राहु से युत हो तो इसके अन्तर में रोग, अकस्मात् कलह पिता- पुत्र से वियोग।।२८१।। स्वबंधुजनहानिश्च सर्वत्र जनपीडनम् । दायादि कलहं चैव स्वप्रभोः स्वस्यमृत्युकृत् ।।२८२।। अपने बन्धुओं की हानि, सभी जनों को कष्ट, दायादों से कलह, अपने स्वामी तथा अपने को मृत्युतुल्य कष्ट।।२८२।। कलत्रपुत्रपीडां च शूलरोगादि सम्भवम् । दायेशात्केन्द्रराशिस्थे त्रिकोणे वा समन्विते ।।२८४।। स्त्री पुत्र को कष्ट और शूल रोग की सम्भावना होती है। दशेश से केन्द्र वा त्रिकोण में वा युत हो।।२८४।।