भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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४९२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । राज्यत्वं राजपूज्यत्वं धनार्थं धनलाभकृत् । आरोग्यभूषणं चैव मित्रस्त्रीपुत्रसंपदः ॥२९९॥ राजा होता है अथवा राजा से पूज्य होता है, धन के लिये धनका लाभ होता है, आरोग्यता, आभूषण, मित्र, स्त्री, पुत्र, सम्पत्ति का लाभ होता है॥२९९॥ पूर्णचन्द्रे पूर्णफलं राजप्रीत्या शुभावहम् । अश्ववाहनलाभः स्याद्गृहक्षेत्रादिवृद्धिकृत् ॥३००॥ पूर्ण चन्द्रमा हो तो पूर्णफल होता है और राजा की प्रसन्नता से शुभद फल होते हैं और घोड़ा आदि वाहनों का लाभ और गृह क्षेत्र आदि की वृद्धि होती है॥३००॥ दायेशात्सुखभाग्यस्थे केन्द्रे वा लाभगेऽपिवा । लक्ष्मीकटाक्षचिन्हानि गृहे कल्याणसम्भवम् ॥३०१॥ दशेश से चौथे नवें, केन्द्र वा लाभ स्थान में हो तो लक्ष्मी की कृपा के चिह्न दिखाई देते हैं, गृह में कल्याण होता है॥३०१॥ पूर्णकार्यार्थसिद्धिः स्याद्धनधान्यसुखावहम् । सत्कीर्त्तिलाभसन्मानं देव्याराधनमाचरेत् ॥३०२॥ पूर्णकार्य और धन का लाभ, कीर्त्ति वृद्धि और सन्मान होता है। देवाराधन करना चाहिये॥३०२॥ दायेशात्षष्ठरंध्रस्थे व्यये वा बलसंयुते । पिशाचक्षुद्रव्याघ्रादिगृहक्षेत्रार्थनाशनम् ॥३०३॥ दशेश से ६।८।१२ वें भाव में बलवान् हो तो पिशाच, क्षुद्रजन्तु-व्याघ्र आदि से गृह-खेती और धन का नाश होता है॥३०३॥ मार्गेचौरभयं चैव व्रणाधिक्यं महाभयम् । द्वितीयद्यूननाथेतु अपमृत्युस्तदा भवेत् । श्वेतांगा महिषीं दद्याद्दानेनारोग्यता भवेत् ॥३०४॥ मार्ग में चोर का भय और व्रण (फोड़ा) से बड़ा भय होता है। २।७ भाव के स्वामी हो तो अपमृत्यु का भय होता है। सफेद गौ भैंस के दान से आरोग्यता होती है॥३०४॥ अथराहुदशायां भौमान्तर्दशाफलम्- राहोरन्तर्गतेभौमे लग्नाल्लाभत्रिकोणगे । केन्द्रे वा शुभसंयुक्ते स्वोच्चे स्वक्षेत्रमेऽपि वा ॥३०५॥