बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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५२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् उदाहरण— लग्न ९।१५।२२।३७ है। इसमें ३ अंश के अनुसार छठा ६ दशमांश हुआ। लग्न राशि के सम होने से उससे ९वीं राशि कन्या से गिनने से छठी राशि कुम्भ के स्वामी शनि का दशमांश हुआ। इसके मारुत स्वामी हैं। दशमांशचक्रम्—
| विषमे स्वामिनः | अंश | मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | कं. | तु. | वृ. | ध. | म. | कुं. | मी. | समे स्वामिनः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इन्द्रः | ३ | १ मं. | १० श. | ३ बु. | १२ बृ. | ५ सू. | २ शु. | ७ शु. | ४ चं. | ९ बृ. | ६ बु. | ११ श. | ८ मं. | अनंत |
| अग्निः | ६ | २ शु. | ११ श. | ४ चं. | १ मं. | ६ शु. | ३ बु. | ८ मं. | ५ सू. | १० श. | ७ शु. | १२ बृ. | ६ बु. | ब्रह्मा |
| यमः | ९ | ३ बु. | १२ बृ. | ५ सू. | २ शु. | ७ शु. | ४ चं. | ९ बृ. | ६ बु. | ११ श. | ८ मं. | १ मं. | १० श. | ईशान |
| राक्षस | १२ | ४ चं. | १ मं. | ६ बु. | ३ बु. | ८ मं. | ५ सू. | १० श. | ७ शु. | १२ बृ. | ९ बृ. | २ शु. | ११ श. | कुबेर |
| वरुण | १५ | ५ सू. | २ शु. | ७ शु. | ४ चं. | ९ बृ. | ६ बु. | ११ श. | ८ मं. | १ मं. | १० श. | ३ बु. | १२ बृ. | मारुत |
| मारुत | १८ | ६ बु. | ३ बु. | ८ मं. | ५ सू. | १० श. | ७ शु. | १२ बृ. | ९ बृ. | २ शु. | ११ श. | ४ चं. | १ मं. | वरुण |
| कुबेर | २१ | ७ शु. | ४ चं. | ९ बृ. | ६ बु. | ११ श. | ८ मं. | १ मं. | १० श. | ३ बु. | १२ बृ. | ५ सू. | २ शु. | राक्षस |
| ईशान | २४ | ८ मं. | ५ सू. | १० श. | ७ शु. | १२ बृ. | ९ बृ. | २ शु. | ११ श. | ४ चं. | १ मं. | ६ बु. | ३ बु. | यम |
| ब्रह्मा | २७ | ९ बृ. | ६ बु. | ११ श. | ८ मं. | १ मं. | १० श. | ३ बु. | १२ बृ. | ५ सू. | २ शु. | ७ शु. | ४ चं. | अग्नि |
| अनंत | ३० | १० शु. | ७ बृ. | १२ बृ. | ९ शु. | २ श. | ११ चं. | ४ मं. | १ बु. | ६ बु. | ३ बु. | ८ मं. | ५ सू. | इन्द्र |
| अथ द्वादशांशमाह— | ||||||||||||||
| द्वादशांशस्य गणना तत्तत्क्षेत्राद्विनिर्दिशेत्। | ||||||||||||||
| तेषामधीशाः क्रमशोगणेशाश्वियमहयः॥१४॥ | ||||||||||||||
| एक राशि में १२ द्वादशांश २ अंश ३० कला के होते हैं। उनकी गणना | ||||||||||||||
| उसी राशि से होती है। उनके स्वामी क्रम से गणेश, अश्विनीकुमार, | ||||||||||||||
| यम और अहि (सर्प) होते हैं॥१४॥ | ||||||||||||||
| उदाहरण— लग्न ९।१५।२२।३७ है। यहाँ २°।३०' के अनुसार ७वाँ | ||||||||||||||
| द्वादशांश मकर से गिनने से कर्क राशि के स्वामी चन्द्रमा का है। उसके | ||||||||||||||
| स्वामी यम हैं। |