भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 51

षोडशवर्गाध्यायः ५३ अथ द्वादशांशचक्रम्-

स्वामीमे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.अंशाः
गणेश१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.२।३०
अश्वि२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.५।०
यम३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.७।३०
अहि४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.१०।०
गणेश५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.१२।३०
अश्वि६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.१५।०
यम७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.१७।३०
अहि८ मं.९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.२०।०
गणेश९ बृ.१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.२२।३०
अश्वि१० श.११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.२५।७
यम११ श.१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.२७।३०
अहि१२ बृ.१ मं.२ शु.३ बु.४ चं.५ सू.६ बु.७ शु.८ मं.९ बृ.१० श.११ श.३०।०

अथ षोडशांशमाह- अजसिंहाश्वितो ज्ञेया नृपांशाः क्रमशः सदा। अजविष्णुहरः सूर्यो ह्योजे युग्मे प्रतीपकम् ॥१५५॥ एक राशि में १अंश ५२ कला और ३० विकला का एक षोडशांश होता है। इस प्रकार एक राशि में १६ षोडशांश होता है। मेष आदि राशियों में क्रम से मेष, सिंह और धन से आरम्भ होता है। इनके अज, विष्णु, हर और सूर्य स्वामी होते हैं॥१५५॥ उदाहरण- लग्न ९।१५।२२।३७ है। इसमे उक्त नियम से नवाँ षोडशांश धन राशि के स्वामी गुरु का हुआ। इसके स्वामी ब्रह्मा हैं।

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक) · पृष्ठ 51, कुल 800 में से · BharatKosha