बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथान्तर्दशाफलविचाराध्यायः । ५१५ इसकी शान्ति के लिये मृत्युंजय का जप, बकरी और बैल का दान करने से सभी सम्पत्तियों का लाभ होता है।।६७।। अथशनिदशायां गुर्वन्तर्दशाफलम्- मन्दसस्यान्तर्गतेजीवे केन्द्रे लाभत्रिकोणभे । लग्नाधिपेन संयुक्ते स्वोच्चे स्वक्षेत्रगेऽपिवा ।।६८।। शनि की दशा में केन्द्र, लाभ वा त्रिकोण में गये हुये लग्नेश से युत अपने उच्च वा अपनी राशि में गये हुये गुरु के अन्तर में ।।६८।। सर्वकार्यार्थसिद्धिः स्याच्छोभनं भवतिध्रुवम् । महाराजप्रसादेन धनवाहनभूषणम् ।।६९।। सभी प्रकार के कार्यों की सिद्धि तथा धन का लाभ होता है। महाराजा की प्रसन्नता से धन वाहन आभूषण का लाभ।।६९।। देवतागुरुभक्तिश्च विद्वज्जनसमागमः । दारपुत्रादिलाभश्च पुत्रकल्याणवैभवम् ।।७०।। देवता-गुरु में भक्ति विद्वानों का समागम, स्त्री पुत्र आदि का लाभ पुत्र को सुख और वैभव की प्राप्ति होती है।।७०।। दायेशात्केन्द्रकोणे वा धने वा लाभगेऽपि वा । विभवं दारसौभाग्यं राजश्री धनसम्पदः ।।७१।। दशेशं से केन्द्र-कोण वा दूसरे वा लाभ में हो तो वैभव, स्त्री का सुख, राज्यलक्ष्मी, धन सम्पत्ति।।७१।। भोजनाम्बर सौख्यं च दानधर्मादिकं लभेत् । ब्रह्मप्रतिष्ठासिद्धिश्च ऋतुकर्मफलप्रदम् ।।७२।। भोजन वस्त्र का सुख, दान, धर्मादि क्रियायें, प्रतिष्ठा का लाभ, यज्ञकर्म का फल।।७२।। अन्नदानं महाकीर्त्तिर्वेदांतश्रवणादिकम् । षष्ठाष्टमव्यये जीवे नीचे वा पापसंयुते ।।७३।। अन्नदान, अत्यन्त कीर्त्ति और वेदांत का श्रवण होता है। यदि गुरु ६।८।१२ भाव में हो वा नीच में वा पापयुत हो तो।।७३।। आत्मसम्बंधि मरणं धनधान्यविनाशनम् । राजस्थानजनद्वेषः कार्यहानिर्भविष्यति ।।७४।।