भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 514, कुल 800 में से

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वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । ५१६ आत्मीय संबंधी का मरण, धन धान्य का नाश, राजकीय पुरुषों से द्वेष कार्य की हानि होती है।।७४।। विदेशगमनं चैव कुष्ठरोगादिसम्भवः । दायेशात्षष्ठरन्ध्रे वा व्यये वा बलवर्जिते ।।७५।। विदेश यात्रा और कुष्ठरोग की सम्भावना होती है। दशेश से ६ वा ८ वा १२ स्थान में निर्बल हो तो।।७५।। बंधुद्वेषं मनोदुःखं कलहं पदविच्युतिम् । कुभोजनं कर्महानिराजमूलाद्धनव्ययम् ।।७६।। बंधुओं से द्वेष, मन को दुःख, कलह और पद की हानि, कुभोजन, कार्य की हानि, राजमूल से धन का व्यय।।७६।। कारागृहप्रवेशं च पुत्रदारादिपीडनम् । द्वितीयद्यूननाथे तु देहबाधा भविष्यति ।।७७।। जेलयात्रा, पुत्र स्त्री को कष्ट होता है। २।७ भाव का स्वामी हो तो शरीर में बाधा होती है।।७७।। आत्मसम्बन्धिमरणं भविष्यति न संशयः । तद्दोषपरिहारार्थं शिवसाहस्रकं जपेत् । स्वर्णदानं प्रकुर्वीत आरोग्यं भवति ध्रुवम् ।।७८।। आत्मीय सम्बन्धि का मरण होता है। इस दोष में शान्ति के लिये शिवसहस्रनाम का जप और सुवर्ण का दान करने से आरोग्यता होती है।।७८।। इति शनिदशायामन्तर्दशाफलम्। अथबुधदशायांबुधान्तर्दशाफलम्- मुक्ताविद्रुमलाभश्च ज्ञानकर्मसुखादिकम् । विद्यामहत्वं कीर्त्तिश्च नूतनप्रभुदर्शनम् ।।१।। बुध की दशा में बुध के अन्तर में मुक्ता (मोती) मूङा का लाभ, ज्ञान, सत्कर्म, लाभादि, विद्या का महत्व, कीर्त्ति, नये स्वामी का दर्शन।।१।। विभवं दारपुत्रादिपितृमातृसुखोवहम् । नीचोग्रखेटसंयुक्ते षष्ठाष्टव्ययराशिगे ।।२।। वैभव और स्त्री, पुत्र पिता का सुख होता हैं। यदि अपनी नीचराशि उग्रग्रह से युक्त हो वा ६।८।१२ राशि में हो।।२।।

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