भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 516

५१८ वृहतपाराशरहोराशास्त्रम् । वाहनात्पतनं चैव पुत्रक्लेश समायुतम् । चौरादिराजभीतिश्च पापकर्मरतः सदा ।।१०।। वाहन से पतन, पुत्र कष्ट से युक्त, चौर आदि से तथा राजा से भय, सदा पापकर्म में रत।।१०।। वृश्चिकादिविषाद्भीतिर्नीचैः कलहसंयुतः । शोकरोगादि दुःखं च संसाराद्विचलं भवेत् ।।११।। वृश्चिक (बिच्छू) आदि जहरीले जानवरों के विष से भय, नीचों से झगड़ा, शोक-रोग आदि दुःखों से युक्त और संसार से विचलित होता है।।११।। द्वितीयद्यूननाथे तु देहजाड्यं भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं छागदानं तु कारयेत् ।।१२।। २ वा ७ भाव का स्वामी हो तो शरीर में जड़ता होती है। इसके शान्त्यर्थ बकरी का दान करना चाहिये।।१२।। अथबुधदशायांशुक्रान्तर्दशाफलम् - सौम्यस्यान्तर्गते शुक्रे केन्द्रे लाभत्रिकोणगे । सत्कथापुण्यं धर्मादिसंग्रहः पुण्यकर्मकृत् ।।१३।। 'बुध की दशा में केन्द्र वा लाभ वा त्रिकोण में गये हुये शुक्र के अन्तर में अच्छी कथा, पुण्य धर्मादि का संग्रह, पुण्य कर्म ।।१३।। मित्रप्रभुवशादिष्टं क्षेत्रलाभः सुखं भवेत् । दशाधिपात्केन्द्रगतस्त्रिकोणे लाभगेऽपिवा ।।१४।। मित्र और स्वामी के इष्ट की सिद्धि, क्षेत्र का लाभ, सुख दशेश से केन्द्र वा लाभ वा त्रिकोण में हो तो।।१४।। तत्काले श्रियमाप्नोति राजश्री धनसम्पदः । वापीकूपतडागादि दानधर्मादिसंग्रहः ।।१५।। तत्काल धन का लाभ, राज्यलक्ष्मी की प्राप्ति, वापी, कूप, तालाब, दान, धर्म आदि का संग्रह।।१५।। व्यवसायात्फलाधिक्यं धनधान्यसमृद्धिकृत् । दायेशात्षष्ठरन्ध्रस्तेव्यये वा बलवर्जिते ।।१६।। व्यवसाय से अधिक लाभ और धन-धान्य समृद्धि का लाभ होता है। दशेश - से ६।८।१२ भाव में निर्बल हो तो।।१६।।