भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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षोडशवर्गाध्यायः ५५ एक राशि में २० विंशांश १अंश ३० कला के होते हैं। चर राशि में मेष से, स्थिर राशि में धन से और द्विस्वभाव राशि में सिंह से आरम्भ होकर २० राशि तक होता है।।१६।। काली गौरी जया लक्ष्मीर्विजया विमला सती । तारा ज्वालामुखी श्वेता ललिता बगलामुखी ।।१७।। इनके स्वामी विषम राशि में क्रम से काली, गौरी, जया, लक्ष्मी, विजया, विमला, सती, तारा, ज्वालामुखी, श्वेता, ललिता, बगलामुखी है।।१७।। प्रत्यङ्गिरा शची रौद्री भवानी वरदा जया । त्रिपुरा सुमुखी चेति विषमे परिचिन्तयेत् ।।१८।। प्रत्यंगिरा, शची, रौद्री, भवानी, वरदा, जया, त्रिपुरा, सुमुखी है।।१८।। समराशौ दया मेधा छिन्नशीर्षा पिशाचिनी । धूमावती च मातङ्गी बाला भद्राऽरुणाऽनला ।।१९।। सम राशि में दया, मेधा, छिन्नशीर्षा, पिशाचिनी, धूमावती, बाला, भद्रा, अरुणा और अनला है।।१९।। पिङ्गला छुच्छुका घोरा वाराही वैष्णवी सिता । भुवनेशी भैरवी च मङ्गला ह्यपराजिता ।।२०।। पिंगला, छुच्छुका, घोरा, वाराही, वैष्णवी, सिता, भुवनेशी, भैरवी, मंगला और अपराजिता ये स्वामी होते हैं।।२०।। उदाहरण— लग्न ९।१५।२२।३७ है, अतः ११वाँ त्रिंशांश कुम्भ राशि के अधिपति शनि का हुआ और इसके स्वामी पिंगला देवी हुई। विंशांशचक्रम्—

सां.विषमे स्वा.मे.वृ.मि.क.सि.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.समे स्वा.अ.क.
काली<br>मं.<br>बृ.<br>सु.<br>मं.<br>बृ.<br>सु.<br>मं.<br>बृ.<br>सु.<br>मं.<br>बृ.<br>सु.दया३०
गौरी<br>शु.१०<br>श.<br>बु.<br>शु.१०<br>श.<br>बु.<br>शु.१०<br>श.<br>बु.<br>शु.१०<br>श.<br>बु.मेधा
जया<br>बु.११<br>श.<br>शु.<br>बु.११<br>श.<br>शु.<br>बु.११<br>श.<br>शु.<br>बु.११<br>श.<br>शु.छिन्नशी.३०

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