भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 534, कुल 800 में से

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५३६ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । इसके शान्त्यर्थ कृष्ण गौ, भैंस का दान करने से आयु, आरोग्यता की वृद्धि होती है।।६५।। अथ केतुदशायांबुधान्तर्दशफलम्- केतोरन्तर्गते सौम्ये केन्द्रलाभ त्रिकोणगे । स्वोच्चे स्वक्षेत्रसंयुक्ते राज्यलाभोमहत्सुखम् ।।६६।। केतु की दशा में केन्द्र वा लाभ वा त्रिकोण वा अपनी उच्चराशि वा अपनी राशि में युक्त बुध के अन्तर में राज्य का लाभ, महासुख।।६६।। सत्कथा श्रवणं दानं धर्मसिद्धिः सुखावहा । भूलाभः पुत्रलाभश्च शुभगोष्ठी धनागमः ।।६७।। अच्छी कथा का श्रवण, दान, धर्म कार्य की सिद्धि, सुख, भूमि का लाभ, पुत्र का लाभ, शुभगोष्ठी, धन का आगमन।।६७।। अयत्नात् धर्मलब्धिश्च विवाहश्च भविष्यति । गृहे शुभकरं चैव वस्त्राभरण भूषणम् ।।६८।। बिना प्रयत्न के धर्म का लाभ, विवाह गृह में शुभकार्य, वस्त्र, आभूषण का लाभ होता है।।६८।। भाग्यकर्माधिपैर्युक्ते भाग्यवृद्धिः सुखावहा । विद्वद्गोष्ठीकलापेन संतोषो भूषणादिकम् ।।६९।। भाग्येश में कर्मेश से युत हो तो सुखकर भाग्यवृद्धि, विद्वानों की गोष्ठी से संतोष, आभूषण आदि का लाभ होता है।।६९।। दायेशात्केन्द्रभे सौम्ये त्रिकोणे लाभगेऽपिवा । देहारोग्यं महांल्लाभः पुत्रकल्याणवैभवम् ।।७०।। दशेश से केन्द्र वा त्रिकोण वा लाभ में बुध हो तो देह में आरोग्यता, महालाभ, पुत्र जनित कल्याण और वैभव।।७०।। भोजनाम्बरबश्वादिव्यवसायेऽधिकं फलम् । षष्ठाष्टमव्यये सौम्ये मन्दराहियुतेक्षिते ।।७१।। भोजन, वस्त्र, पशु आदि के व्यवसाय से अधिक लाभ होता है यदि बुध ६।८।१२ भाव में शनि, भौम, राहु से युत वा दृष्ट हो तो।।७१।। विरोधो राजभृत्यैश्च परगेहनिवासनम् । वाहनाम्बरपश्वादि धनधान्यादिनाशकृत् ।।७२।।

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