भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 538

५४० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । व्रण से पीड़ा, सर्प का भय, अपने गृह में भय, अनेक रोग का भय और गृह-कोष का नाश होता है।।१७।। सप्तमाधिपदोषेण देहवाधा भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं सूर्य शान्ति च कारयेत् ।।१८।। सप्तमेश होने से शरीर बाधा होती है। इस दोष के शान्त्यर्थ सूर्य की शान्ति करनी चाहिये।।१८।। अथशुक्रदशायांचन्द्रान्तर्दशाफलम्- शुक्रस्यान्तर्गते चन्द्रे केन्द्रलाभत्रिकोणगे । स्वोच्चे स्वक्षेत्रगे चैव भाग्यकर्मेशसंयुते ।।१९।। शुक्र की दशा में केन्द्र वा लाभ वा त्रिकोण में वा अपने उच्च वा अपनी राशि में भाग्य कर्मेश से युत।।१९।। शुभयुक्ते पूर्णचन्द्र राज्यनाथेन संयुते । तद्भुक्तौ वाहनाधिक्येनापत्येन महत्सुखम् ।।२०।। वा शुभग्रह से युत पूर्णचन्द्र कर्मेश से युत चन्द्रमा हो तो उसके अंतर में अधिक वाहनों और लड़कों से बड़ा सुख होता है।।२०।। महाराज प्रसादेन गजांतैश्वर्यमादिशेत् । महानदीस्नानं पुण्यं देवब्राह्मणपूजनम् ।।२१।। महाराजा की प्रसन्नता से हाथी आदि ऐश्वर्य से सुख, महानदी के स्नान का पुण्य, देवता ब्राह्मण का पूजन।।२१।। गीतवाद्यप्रसङ्गादि विद्वज्जन विभूषणम् । गोमहिष्यादिवृद्धिश्च व्यवसायेऽधिकं फलम् ।।२२।। गीत बाजे का प्रसंग, विद्वानों का आदर, गौ-भैंस की वृद्धि, व्यवसाय में लाभ।।२२।। भोजनाम्बरसौख्यं च बन्धुसंयुक्तभोजनम् । नीचे वास्तंगते वापि षष्ठाष्टव्ययराशिगे ।।२३।। भोजन, वस्त्र का सुख और बन्धु के साथ भोजन होता है यदि चन्द्रमा नीच राशि में वा अस्त वा ६।८।१२ राशि में ।।२३।। दायेशात्षष्ठगे वापि रन्ध्रे वा व्ययराशिमे । तत्काले धननाशः स्यात्संचरेतमहद्भयम् ।।२४।।