बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५४८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । १२० का भाग देने से लब्धि दिनादि उस ग्रह के प्रत्यन्तर होता है ।।१।। उदाहरण-जैसे सूर्य की दशा में सूर्य का अन्तर ० वर्ष ३ मास और १८ दिन होता है, इसे सूर्य के दशा वर्ष ६ से गुणा करने से १ वर्ष ९ मास १८ दिन हुये इसमें १२० का भाग देने से ० वर्ष ० मास ५ दिन और २४ घटी यह सूर्य की दशा में सूर्य के अन्तर में सूर्य का प्रत्यन्तर्दशा हुआ। ०।३।१८ को ६ से गुणा किया तो १।९।१८ इसमें १२० का भाग दिया १२०)१।९।१८( ० व १२ १२+९ इसी प्रकार सूर्य की दशा में चन्द्रमा के २१ ( ० मा. अन्तर्दशा वर्षादि ०।६।० को २१x३० सूर्य के दशावर्ष ६ से गुणाकर ६३०+१८ १२० का भाग दिया ६४८ ( ५ दि. ०।६।०x६ ६०० १२० ) ०।३६।० ( ० व. ४८x६० १२ २८८०( २४ घ. ०+३६ २४० ३६ ( ० मा. ४८० x ३० ४८० १०८० ( ९ दि. X १०८० X यह सूर्य की दशा में सूर्य के अन्तर में चन्द्रमा का प्रत्यन्तर हुआ। इसी प्रकार भौमादि के अन्तर्दशा वर्षादि को सूर्य के दशावर्ष से गुणकर १२० से भाग देने से सूर्यान्तर में भौमादि के प्रत्यन्तर्दशा दिनादि आ जाती है। अर्थात् जिस ग्रह के अन्तर्दशा में जिस ग्रह की प्रत्यन्तर्दशा लानी हो उसके अन्तर्दशा वर्षादि को अन्तर्दशेश के दशा वर्ष से गुणकर १२० का भाग देने से उसके प्रत्यन्तर्दशा का दिनादि मान आ जाता है। अथ सूर्यान्तरेसूर्यादीनांप्रत्यन्तर्दशाफलम्- उद्वेगश्च महच्चित्तदारात्तिः शिरसिव्यथा । ब्राह्मणेन विवादश्चसूर्यः स्वविदशांगतः ॥२॥ (सू.सू.)