भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 549, कुल 800 में से

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पृष्ठ 549

अथ प्रत्यन्तर्दशाऽध्यायः । ५४९ सूर्य के अन्तर में सूर्य के प्रत्यन्तर में उद्वेग, धनका तथा स्त्री को बड़ा कष्ट और ब्राह्मण के साथ विवाद होता है ।।२।। उद्वेगं कलहं चित्तपीडां स्वहतिमद्भुताम् । मणिमुक्तादिनाशश्च विदिशासु रवेः शशी ।।३।। (सू.चं.) सूर्य के अन्तर में चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में उद्वेग, कलह, मनको व्यथा, धन का अपहरण और मणि-मुक्ता आदि का नाश होता है।।३।। राजभीति शस्त्रभीतीं बंधनं बहुसंकटम् । शत्रुभंगस्तथा घातो विदशासु रवेःकुजः ।।४।। (सू.मं.) सूर्य के अन्तर में भौम के प्रत्यन्तर में राजभय, शस्त्रभय, बंधन, अनेक संकट, शत्रु और अग्नि से पीड़ा होती है।।४।। श्लेष्मव्याधिं शस्त्रभीतिं धनहानिं महद्भयम् । राजभंगस्तथा घातो विदशासु रवेस्तमः ।।५।। (सू.रा.) सूर्य के अन्तर में राहु के प्रत्यन्तर में कफव्याधि, शस्त्र से भय, धनकी हानि, बड़ा भय, राजका भंग और चोट आदि से कष्ट होता है।।५।। शत्रुनाशं जयं वृद्धिं वस्त्रहेमादिभूषणम् । वस्त्रयानादि लब्धिं च गोधनं च रवेर्गुरुः ।।६।। (सू.गु.) सूर्य के अन्तर में गुरु के प्रत्यन्तर में शत्रु का नाश, विजय, उन्नति, वस्त्र, सुवर्ण के आभूषण, सवारी और गौ का लाभ होता है।।६।। धनहानिः पशोःपीडा महोद्वेगो महारूजः । अशुभं सर्वमाप्नोति विदशासु रवेः शनि ।।७।। (सू.श.) सूर्य के अन्तर में शनि के प्रत्यन्तर में धन की हानि, पशु को पीड़ा, उद्वेग, महारोग और अनेक अशुभ होते हैं।।७।। विद्यालाभो बंधुसंगो भोज्यप्राप्तिर्धनागमः । धर्मलाभो नृपात्पूजा विदशासु रवेर्बुधः ।।८।। (सू.बु.) सूर्य के अन्तर में बुध के प्रत्यन्तर में विद्या का लाभ, बंधु का समागम, भोज्य की प्राप्ति, धन का आगम, धर्म का लाभ और राजा से आदर होता है।।८।। प्राणभीतिर्महाहानी राजभीतिश्च विग्रहः । शत्रुजा च महावादो विदशासुखेः शिखी ।।९।। (सू.के.)