भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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षोडशवर्गाध्यायः ५७ कर्काद्युग्मभके खेटे स्कन्दः पशुधरोऽनलः ।।२१।। विश्वकर्मा भगो मित्रो भगोऽन्तकवृषध्वजाः । गोविन्दो मदनो भीमः सिंहादौ विषमे क्रमात् । कर्कादौ समभे भीमाद्विलोमेन विचिन्तयेत् ।।२२।। एक राशि में १ अंश १५ कला के २४ चतुर्विंशांश होते हैं। विषम राशि लग्न हो तो सिंह से और सम राशि में कर्क से गणना कर २४ राशियों का चतुर्विंशांश होता है। विषम राशि में क्रम से स्कंद, पशुधर, अनल, विश्वकर्मा, भग, मित्र, भग, अंतक, वृषध्वज, गोविंद, मदन, भीम, फिर स्कंद से भीम पर्यन्त एवं सम राशि में भीम से उत्कय रीति से गिनने से स्वामी होते हैं।। २१-२२ ।। उदाहरण- लग्न ९ ।१५ ।२२ ।३७ सम राशि में कर्क से गिनने से १३वाँ कर्क राशि यानि चन्द्र का चतुर्विंशांश हुआ और उसके भीम स्वामी हुए। चतुर्विंशांश चक्रम्—

सं.विषमे स्वा.में.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.समे स्वा.अं.क.
स्कन्दः१।१५भीमः
पशुधरः२।३०मदनः
अनलः३।४५गोविन्दः
विश्वकः५।०वृषध्वजः
भगः६।१५अंतकः
मित्रः१०१०१०१०१०१०७।३०यमः
यमः१११०१११०१११०१११०१११०१११०८।४५मित्रः
अंतकः१२१११२१११२१११२१११२१११२१११०।०भगः
वृषध्वजः१२१२१२१२१२१२११।१५विश्वक.
१०गोविन्दः१२।३०अनलः
११मदनः१३।४५पशुधरः
१२भीमः१५।०स्कंदः
१३सकन्दः१६।१५भीमः
१४पशुधरः१७।३०मदनः
१५अनलः१८।४५गोविन्दः
१६विश्वक.२०।०वृषध्वजः
१७भगः२१।१५अंतकः

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