भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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५८ : बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

सं.विषमे स्वा.मे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.समे स्वा.अं.क.
१८मित्रः१०१०१०१०१०१०२२३०यमः
१९यमः१११०१११०१११०१११०१११०१११०२३४५मित्रः
२०अंतकः१२१११२१११२१११२१११२१११२११२५यमः
२१वृषध्वजः१२१२१२१२१२१२२६१५विश्वकर्मा
२२गोविन्दः२७३०अनलः
२३मदनः२८४५पशुधरः
२४भीमः३०स्कन्दः
भांशमाह-
नक्षत्रेशाः क्रमाद्द्वस्रयमवह्निपितामहाः।
चन्द्रेशादितिजीवाहि पितरो भगसंज्ञिताः।।२३।।
अर्यमार्कस्त्वष्ट्रमरुच्छक्राग्निमित्रवासवाः।
निर्र्त्युदकविश्वेऽज गोविन्दो वसवोऽम्बुपः।।२४।।
ततोऽजयादहिर्बुध्न्यः पूषा चैव प्रकीर्त्तिताः।
नक्षत्रेशास्तु भांशेशा भांशसंख्यः चरात्क्रमात्।।२५।।
एक राशि में २७ अंश १ अंश ६ कला और ४० विकला के होते हैं।
प्रत्येक राशियों में क्रम से चर राशि से आरम्भ होता है और उनके स्वामी
नक्षत्रेश होते हैं। शेष चक्र में देखिए।। २३-२५ ।।
उदाहरण- लग्न ९/१५/२२/३७ है। इसमें सिंह राशि यानि सूर्य
भांशपति हुआ और नक्षत्रेश त्वष्टा हुए।
भांशचक्रम्-
सं.स्वामीमे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.अ.क.वि.
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अश्वि.कु.मी.१०१०१०४०
यम१११११११३२०
अग्नि१२१२१२२०
ब्रह्मा१०१०१०२६४०
चन्द्र१०१०१०३३२०
शंकर१०१०१०४०
अदिति१०१०१०४६४०
जीव११११११५३२०
अहि१२१२१२१०
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