भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 551

अथ प्रत्यन्तर्दशाऽध्यायः । ५५१ पुत्रजन्म‌हयप्राप्तिर्विद्यालाभो महोन्नतिः । शुक्लवस्त्रान्नलाभश्च चन्द्रचन्द्रान्तरे बुधः ।।१६।। (चं.बु.) चन्द्रमा के अन्तर में बुध के प्रत्यन्तर में पुत्र का जन्म, घोड़े की प्राप्ति, विद्या का लाभ, अत्यन्त उन्नति और सफेद वस्त्र एवं अन्न का लाभ होता है।।१६।। ब्राह्मणेन समं युद्धमपमृत्युः सुखक्षयः । सर्वत्र जायते क्लेशश्चन्द्रचन्द्रान्तरे शिखी ।।१७।। (चं.के.) चन्द्रमा के अन्तर में केतु के प्रत्यंतर में ब्राह्मण के साथ युद्ध, अपमृत्यु, सुख की हानि और सर्वत्र कष्ट प्राप्त होता है।।१७।। धनलाभो महत्सौख्यं कन्याजन्मं सुभोजनम् । प्रीतिश्च सर्वलोकेभ्यश्चन्द्रचन्द्रान्तरे भृगुः ।।१८।। (चं.शु.) चन्द्रमा के अन्तर में शुक्र के प्रत्यन्तर में धन का लाभ, महासुख, कन्या का जन्म, सुन्दर भोजन और सभी प्राणियों से प्रेम होता है।।१८।। अन्नागमो वस्त्रलाभः शत्रुहानिः सुखागमः । सर्वत्र विजयप्राप्तिश्चन्द्रचन्द्रान्तरे रविः ।।१९।। (चं.सू.) चन्द्रमा के अन्तर में सूर्य के प्रत्यन्तर में अन्न का आगम, वस्त्र का लाभ, शत्रु का नाश और सर्वत्र विजय होती है।।१९।। इति चन्द्रान्तरे प्रत्यन्तर फलम् - अथ भौमान्तरेभौमादीनांप्रत्यन्तरफलम् - शत्रुभीतिं कलिं घोरमकस्माज्जायते भयम् । रक्तस्रावोऽपमृत्युश्च विदिशासुस्वयं कुजः ।।२०।। (मं.मं.) भौम के अन्तर में भौम ही के प्रत्यन्तर में शत्रु का भय, अकस्मात् घोररूप से झगड़ा, भय, रक्तस्राव और अपमृत्यु होती है।।२०।। बंधनं राजभङ्गं च - धनहानिः कुभोजनम् । कलहं शत्रुभिर्नित्यं भौमभौमान्तरे तमः ।।२१।। (मं.रा.) भौम की दशा में राहु के अन्तर में बंधन, राज्य का नाश, धन की हानि, खराब भोजन, नित्य शत्रु से कलह होता है।।२१।। मतिनाशं तथा दुःखं संतापः कलहो भवेत् । विफलं चिंतितं सर्वं भौमभौमान्तरे गुरुः ।।२२।। (मं.वृ.)