बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५५२. बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । भौम के अन्तर में गुरु के प्रत्यन्तर में बुद्धि का नाश, दुःख, संतापं कलह और सभी चिंतित कार्य विफल हो जाते हैं।।२२।। स्वामिनाशस्तथा पीडा धनहानिर्महाभयम् । वैकल्यं कलहंस्त्रासो भौमभौमान्तरे शनिः ।।२३।। (मं.श.) भौम के अन्तर में शनि के प्रत्यन्तर में स्वामी का नाश, पीडा, धन की हानि, महाभय, विकलता, कलह और त्रास होता है।।२३।। सर्वथा बुद्धिनाशश्च धनहानिज्वरस्तनौ । वस्त्रान्नसुहृदां नाशो भौमभौमान्तरे बुधः ।।२४।। (मं.बु.) भौम के अन्तरदशा में बुध के प्रत्यन्तर में बुद्धि का नाश, धनहानि, शरीर में ज्वर, वस्त्र अन्न और मित्रों का नाश होता है।।२४।। आलस्यं च शिरः पीडा पापरोगअपमृत्युकृत् । राजभीतिः शस्त्रघातो भौमभौमान्तरे शिखी ।।२५।। (मं.के.) भौम के अन्तर में केतु के प्रत्यन्तर में आलस्य, शिर में पीडा, पाप, रोग, अपमृत्यु राजभय और शस्त्र से चोट लगने का भय होता है।।२५।। चांडालात्संकटस्त्रासो राजशस्त्रभयं भवेत् । अतिसारो च वमनं भौमभौमान्तरे भृगुः ।।२६।। (मं.शु.) भौम के अन्तर में शुक्र के प्रत्यन्तर में चांडाल से संकट और त्रास राजा और शस्त्र से भय, अतिसार और वमन होता है।।२६।। भूमिलाभोऽर्थसम्पत्तिः संतोषोमित्रसंमतिः । सर्वत्र सुख माप्नोति भौमभौमान्तरे रविः ।।२७।। (मं.सू.) भौम के अंतर में सूर्य के प्रत्यन्तर में भूमि का लाभ, धन सम्पत्ति का लाभ, संतोष, मित्रों का लाभ और सर्वत्र सुख होता है।।२७।। याम्यां दिशि भवेल्लाभः सितवस्त्रविभूषणम् । संसिद्धिः सर्वकार्याणां भौमभौमान्तरे शशी ।।२८।। (मं.चं.) भौम की दशा में चन्द्रमा के प्रत्यन्तर में दक्षिणदिशा से लाभ, सफेद वस्त्र आभूषण का लाभ और सभी कार्यों की सिद्धि होती है।।२८।। इति भौमप्रत्यन्तर फलम् - अथराह्वन्तरेराह्यादीनां प्रत्यन्तरफलम् - बंधनं बहुधारोगो बाहुघातं सुहृद्भयम् । अकस्मात्प्राप्यते व्याधिः राहुप्रत्यन्तरे राहुः ।।२९।। (रा.रा.)